
हनुमानगढ़ जेल। फाइल फोटो- पत्रिका
हनुमानगढ़। जिला कारागार में रसोई के सामान के साथ नशीला पदार्थ पहुंचाने के प्रयास का मामला सामने आया है। जेल प्रशासन की सतर्कता से तस्करी का प्रयास विफल हो गया और चिट्टा (हेरोइन) बंदियों तक पहुंचने से पहले ही जब्त कर लिया गया। प्याज के एक थैले से 4.95 ग्राम चिट्टा बरामद होने पर दो अज्ञात युवकों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान के प्रयास में जुटी है।
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जंक्शन थाना प्रभारी रामचन्द्र कस्वां ने बताया कि गश्त के दौरान जिला कारागार के अधीक्षक योगेश कुमार तेजी ने सूचना दी कि कुछ समय पहले दो अज्ञात युवक बाइक पर आए थे। वे संतरी पोस्ट पर प्याज से भरे तीन थैले यह कहकर छोड़ गए कि यह जेल के लंगर (रसोई) का सामान है। बाद में जांच करने पर पता चला कि उक्त सामान जेल के लंगर का नहीं था, जिससे संदेह उत्पन्न हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस टीम हनुमानगढ़ जेल परिसर पहुंची और जेल अधीक्षक तथा संतरी राकेश कुमार की मौजूदगी में थैलों की तलाशी ली।
दो थैलों में केवल प्याज भरे हुए थे, जबकि एक थैले में प्याज के साथ टमाटर, लहसुन और हरी मिर्च भी रखी हुई थी। सभी सब्जियों को बाहर निकालकर जांच करने पर एक प्याज पर खाकी रंग की टेप लगी हुई मिली। संदेह होने पर पुलिस ने उस प्याज को खोलकर देखा तो उसके अंदर गुलाबी रंग की तीन पन्नियों में भरा हल्के क्रीम रंग का डलीनुमा पदार्थ मिला। पुलिस अधिकारियों, स्टाफ और स्वतंत्र गवाहों ने अपने अनुभव के आधार पर उसे हेरोइन (चिट्टा) के रूप में पहचाना।
इलेक्ट्रॉनिक कांटे से वजन करने पर बरामद हेरोइन का वजन 4.95 ग्राम पाया गया, जबकि पन्नियों सहित कुल वजन 5.28 ग्राम निकला। पुलिस ने मादक पदार्थ को नियमानुसार जब्त कर सील कर दिया तथा नमूना सील सहित अन्य आवश्यक कार्रवाई पूरी की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अज्ञात युवक हेरोइन को जेल के भीतर पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे। इस संबंध में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट तथा कारागृह अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच महिला थाना प्रभारी रजनदीप कौर को सौंपी गई है।
जिले में बढ़ते नशे और इसकी तस्करी के चलते पुलिस की कार्रवाई भी बढ़ी है। स्थिति यह है कि जिला कारागार में बंद 60 प्रतिशत से अधिक बंदी केवल एनडीपीएस एक्ट के मामलों में निरुद्ध हैं। जेल प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन बंदियों को लेकर है जो स्वयं भी नशे के आदी हैं। जेल में नशा नहीं मिलने पर कई बंदी आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं। ऐसे में नशे के आदी बंदियों के परिजन तथा तस्करी से जुड़े लोग उनके लिए जेल के भीतर नशा पहुंचाने के प्रयास करते रहते हैं।
Updated on:
08 Jun 2026 03:20 pm
Published on:
08 Jun 2026 03:19 pm
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