
हनुमानगढ़: होलिका दहन को लेकर गोबर के उपले बनाती महिलाएं।
हनुमानगढ़. जिले में होली के त्योहार को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। चंग की थाप पर होली गीत सुनाई देने लगे हैं। बाजार में रंग-गुलाल की दुकानों पर स्टॉक किया जा रहा है। रंग व पिचकारी की दुकानें जल्द बाजारों में सजने लगेगी। इस बीच होलिका दहन को लेकर असमंजस की स्थिति है। पंडित रतनलाल शास्त्री के अनुसार शास्त्र सम्मत तरीके से दो मार्च को ही होलिका दहन करना उचित होगा। क्योंकि तीन मार्च को पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी नहीं है। शास्त्री ने होलिका दहन को लेकर बुधवार को स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने पत्रिका को बताया कि लोगों में इस बात का भ्रम है कि होलिका दहन दो या तीन को किया जाए। इसे लेकर सबको सही स्थिति जानना जरूरी है। उन्होंने बताया कि दो मार्च को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में ही होलिका दहन करना चाहिए। तीन मार्च को पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी नहीं है। यद्यपि दो मार्च को सम्पूर्ण प्रदोष काल और अद्र्धरात्रि के बाद तक (प्रात: 5 बजकर 32 मिनट ) तक भद्रा व्याप्त है। अत: शास्त्रानुसार भद्रा में ही प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में होलिका दहन करना उचित रहता है। अगर प्रदोष काल में भद्रा मुखकाल हो तो भद्रा के बाद अथवा प्रदोष काल के बाद होलिका दहन करना चाहिए। दो मार्च को प्रदोष काल में भद्रामुख काल नहीं पड़ता है। इसलिए प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में ही होलिका दहन किया जाना चाहिए। तीन मार्च 2026 को खग्रास चंद्रग्रहण भी लगभग सम्पूर्ण भारत वर्ष में दिखाई देगा। खग्रास चंद्रग्रहण प्रारंभ से 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ होगा। इसलिए देवालयों में और घरों में पूजा पाठ आरती आदि प्रात: 6.25 बजे पहले ही करके देवालयों के कपाट बंद कर देना चाहिए। ग्रहण मोक्ष काल बाद स्नान संध्या कर देव पूजा करनी चाहिए।
गोबर के उपले बनाने में जुटे
हनुमानगढ़. श्री कृष्ण गोशाला सेवा समिति चक डबलीवास मौलवी में होली त्योहार को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। इस दौरान एक लाख आठ हजार बडक़ुलों की एक माला के साथ सीर की होली (सामूहिक होली) के रूप में श्री कृष्ण गोशाला सेवा समिति 2 पीबीएन चक डबलीवास मौलवी मनाने जा रही है। गोशाला के भीमसेन सिहाग ने बताया कि इस विषय में गोशाला कमेटी के अध्यक्ष बाबूलाल भार्गव एवं गो भक्तों के साथ बैठक की गई। पंडित विष्णुदत्त शर्मा उपनिदेशक कृषि विपणन के मार्गदर्शन में गोबर से बडक़ुलें(उपले) बनाए जा रहे हैं। इन उपलों को एक मंूज की डोरी में पिरोकर माला का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें 1100 चांद और सूरज लगाने के साथ ही 108000 हजार बडक़ुले पिरोए जा रहे हैं। इस कार्य के लिए अब तक 43000 से अधिक बडक़ुलों एवं 800 से अधिक सूरज एवं चांद बना लिए गए हैं। गोशाला के बाबूलाल भार्गव, भीमसेन सिहाग, कुलदीप सोमोया, ताराचन्द, मांगी लाल शर्मा, दानाराम, अमन कुमार, संदीप सिहं, कृष्ण भांभू, मैनपाल, पवन थोरी, रणवीर, प्रेम शर्मा, रणजीत पंवार, आदराम, रामलाल, मायादेवी, कौशल्या देवी, ओम भांभू द्वारा बडक़ुलों का निर्माण किया जा रहा है। होलिका दहन दो मार्च एवं तीन मार्च की मध्यरात्रि में 2.15 बजे प्रारम्भ होगा।
Updated on:
27 Feb 2026 10:45 am
Published on:
27 Feb 2026 10:44 am
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