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Nohar News: हनुमानगढ़ के नजदीक नोहर इलाके में स्थित शमशान घाट में शनिवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला। एक ओर चिता जल रही थी और उसके ठीक नजदीक कुछ लोग ताश-पत्ती खेल रहे थे। उनमें से कुछ की आंखे नाम थीं तो कुछ के चेहने भावनून्य थे। नजदीक ही मृतक के परिजन मौजूद थे। नजारा बेहद ही हैरान करने वाला था। दरअसल ताश पत्ती खेल रहे लोग अपने एक साथी को अंतिम विदाई देने के लिए ऐसा कर रहे थे।
दरअसल नोहर कस्बे के रहने वाले मांगीलाल सैनी 97 साल के थे। समय गुजारने, दोस्तों से मिलने और दिमागी रूप से एक्टिव रहने के लिए काफी समय से वे अपने दोस्तों के साथ ताश पत्ती खेला करता थे। दो दिन पहले ताश पत्ती खेलने के दौरान अचानक बीच में ही उनकी मौत हो गई। पता चला कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। साथियों ने उनके परिजनों को सूचना दी और बाद में शनिवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
शनिवार को परिजन और साथी उन्हें सैनी कल्याण भूमि श्मशान घाट लेकर पहुंचे। वहां पर उनके साथ नियमित तौर पर ताश पत्ती खेलने वाले साथी भी आ गए। कुछ की आंखे नम थीं तो कुछ भावशून्य थे। उन्होंने अपने साथी को अनोखी अंतिम विदाई देने के लिए उनके द्वारा छोड़ी गई अधूरी ताश की बाजी को पूरा किया। एक ओर चिता जल रही थी और दूसरी ओर उनके साथी ताश पत्ती खेल रहे थे। बाद में जब चिता पूर्ण हुई तो सभी वहां से चले गए। परिजन भी लंबे समय तक वहीं मौजूद थे।
परिजनों और दोस्तों के अनुसार मांगीलाल वैसे तो 97 वर्ष के थे, लेकिन इस उम्र में भी दिगामी रूप से पूरी तरह स्वस्थ थे। उनका उत्साह युवाओं जैसा था। वे कुछ भूले नहीं थे। परिजन और दोस्तों से संबंधित तमाम बातें उन्हें याद थीं। सभी को पहचानते थे। परिजनों के अनुसार मांगीलाल सैनी बेहद खुशमिजाज और मिलनसार स्वभाव के थे। क्षेत्र में इस अनोखी श्रद्धांजलि की चर्चा पूरे दिन रही। लोगों का कहना था कि सच्ची श्रद्धांजलि वही होती है, जिसमें दिवंगत की पसंद और उसकी शख्सियत की झलक हो।
Updated on:
22 Feb 2026 12:08 pm
Published on:
22 Feb 2026 11:15 am
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