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16 साल की उम्र में शादी, 23 वर्ष की आयु में कैंसर, फिर भी कॉस्टेबल परीक्षा में अव्वल

कहते हैं सोना भी अग्रि में तप कर स्वरूप लेता है और मनुष्य के व्यक्तित्व की पहचान भी संकटों से पार पाने के पश्चात होती है। कुछ ऐसी ही कहानी संगरिया क्षेत्र के गांव भाखरांवाली में जन्मी और हनुमानगढ़ क्षेत्र के गांव धौलीपाल में विवाहित कांस्टेबल सुमन की है।

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मनोज कुमार गोयल/हनुमानगढ़. कहते हैं सोना भी अग्रि में तप कर स्वरूप लेता है और मनुष्य के व्यक्तित्व की पहचान भी संकटों से पार पाने के पश्चात होती है। कुछ ऐसी ही कहानी संगरिया क्षेत्र के गांव भाखरांवाली में जन्मी और हनुमानगढ़ क्षेत्र के गांव धौलीपाल में विवाहित कांस्टेबल सुमन की है। जीवन में एक नहीं अनेक संकटों से मुकाबला करते हुए सफलता हासिल करने वाली सुमन का जीवन हौंसले, जज्ज्बे और सफलता की मिसाल है। पारिवारिक हालात और मां के खराब स्वास्थ्य के चलते महज सोलह बरस की आयु में 2008 में सुमन का विवाह हो गया। तब वह महज दसवीं कक्षा तक अध्ययनरत थी। विवाह के बाद ससुराल गई और घर-गृहस्थी में लग गई लेकिन मन में पढ़ाई का इच्छा और लगन थी।

पति प्रवीण के सहयोग और सहमति से पढ़़ाई जारी रखी। इस बीच, 2010 में बेटी का जन्म हुआ और 2012 में बेटे का जन्म हुआ लेकिन पढ़ाई में बाधा नहीं आई और अनवरत रही। स्नातक तक शिक्षा हासिल करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में भी शामिल हुई। इस दौरान मुसीबतों का पहाड टूट पड़ा और वर्ष 2015 में कैंसर जैसे असाध्य रोग से सुमन पीडि़त हो गई लेकिन हौंसला नहीं छोड़ा। बीकानेर से उपचार चला और दो साल की कड़ी मशक्कत के बाद स्वस्थ हो गई। इस दौरान राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी में स्नातकोत्तर किया और वर्ष 2021 में नेट की परीक्षा उर्तीण की और बीआईएसटी का कोर्स किया।

परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी के बीच पारिवारिक परिस्थितियां ऐसी कीघर-गृहस्थी से बाहर निकलने की सोचना बहुत मुश्किल था। पति प्राइवेट नौकरी में थे, ऐसे में आर्थिक स्थितियां भी अनुकूल नहीं थी। पति और बच्चों सहित श्रीगंगानगर शिफ्ट होना पड़ा। किराए के मकान में रहते हुए पढाई जारी रखी और वर्ष 2021 में कांस्टेबल भर्ती में जिला स्तर पर अव्वल स्थान हासिल किया। सुमन वर्तमान में श्रीगंगानगर पुलिस लाइन में पदस्थापित हैं। अब उनका लक्ष्य कॉलेज एज्युकेशन में जा कर लैक्चरार बनने का है और इस मिशन में वह जुटी हुई हैं।

सुमन कहती हैं, परिस्थितियां ऐसी विकट थी कि कई बार मानसिक और शारीरिक रूप से टूट गई थी लेकिन फिर कुछ व्यक्तित्व पे्ररणादायी बनें और जुट गई मेहनत करने के लिए। वर्ष 2008 में माता जी का स्वास्थ्य खराब था, ऐसे में उनकी (मां) इच्छा थी कि बेटी के हाथ पीले हो जाएं, इस कारण पढाई छूट गई और शादी हो गई लेकिन पढाई करके जॉब लग कर आत्मनिर्भर बनने की मन में इच्छा थी। ऐसे में पति का सहयोग मिला और फिर से उच्च अध्ययन शुरू किया लेकिन 2015 फिर वज्रपात हुआ और कैंसर जैसे असाध्य रोग से पीडि़त हो गई लेकिन ईश्वर में आस्था और स्वयं पर विश्वास रख कर रोग से निजात पाई और फिर तैयारी करके जॉब हासिल किया।


'संघर्ष करें सफलता जरूर मिलती है'

-महिलाओं और युवतियों के समक्ष जीवन में बहुत चुनौतियां आती हैं लेकिन संघर्ष करें, संकटों से घबराएं नहीं, सफलता जरूरत मिलती है। हार नहीं माननी चाहिए। सफलता का शॉटकट नहीं होता है, उसके लिए कड़ी मशक्कत करनी चाहिए। - सुमन, कांस्टेबल, राजस्थान पुलिस।

'हौंसला और जज्ज्बा हर संकट से दिलवाता है मुक्ति'

- मनुष्य के जीवन में बहुत बार आर्थिक, मानसिक, शारीरिक कष्ट आते हैं, पारिवारिक परिस्थितियां विपरीत हो जाती हैं लेकिन हौंसला और जज्ज्बा बरकरार रखें तो हर संकट से मुक्ति मिल जाती है। - राज तिवाड़ी, सुमन के शिक्षक, हनुमानगढ़।

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