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मां की हत्या करने वाले पुत्र को आजीवन की कारावास

- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला मां की हत्या करने वाले पुत्र को आजीवन की कारावास - कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपए जुर्माना भी लगाया

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मां की हत्या करने वाले पुत्र को आजीवन की कारावास

रावतसर. स्थानीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र चौधरी ने माता की हत्या के प्रकरण में आरोपी पुत्र भालाराम उर्फ बलवीर पुत्र कानाराम निवासी न्यौलखी पुलिस थाना रावतसर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करवाने पर आरोपी पुत्र को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया है। प्रकरण के अनुसार स्थानीय पुलिस थाना में नौ दिसम्बर 2018 को परिवादी मोहरसिंह ने मुकदमा दर्ज करवाया था। इसमें बताया था कि मेरी चाची संतोष ढाणी में अपने बेटों ओमप्रकाश व भाला उर्फ बालवीर के साथ रहती है। मगर दोनों बेटे झगड़ालू प्रवृत्ति के हैं। आपस में व अपनी मां के साथ लड़ाई-झगड़ा करते आ रहे हैं। ओमप्रकाश करीब पांच-छह महीनों से गोपीराम की भेड़ चराता है। गांव में ही रहता है। छोटा पुत्र भाला उर्फ बलवीर ट्रक ड्राइवरी करता है तथा अपनी मां के साथ ढाणी में रहता है जो अक्सर शराब पीकर अपनी मां को गालियां निकालता है। मेरी चाची ने मुझे व अन्य परिजनों को इस बारे में कई बार बताया। हमने आरोपी को समझाया पर इसका कोई असर नहीं हुआ। आठ दिसंबर 2018 को भाला गांव आया हुआ था तथा अपने मित्र रूपसिंह के साथ था। रात करीब 10 बजे भाला उर्फ बलवीर ढाणी में अपनी मां को गालियां निकलता हुआ सुनाई दे रहा था। मैं वह मेरा लड़का खेत में ग्वार निकालने के लिए गए थे तो रिश्तेदार का फोन आया और बताया कि तुम्हारी चाची संतोष मेरे खेत में मरी हुई पड़ी है। जब मौके पर पहुंचा तो काफी लोग खड़े थे। चाची का शव खेत में पड़ा हुआ था, सिर पर चोटे थी व मौके पर खून बिखरा हुआ था। हमे शक है कि मेरी चाची को उसके छोटे लड़के भाला ने रात्रि के समय लाठी से मारपीट कर उसकी हत्या की है। मुकदमा दर्ज होने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर बाद अनुसंधान आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।

अभियोजन पक्ष की तरफ से न्यायालय में 18 गवाहों को परीक्षित करवाया गया तथा 23 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे राजेंद्र चौधरी ने बचाव पक्ष की दलीलों को अस्वीकार करते हुए आरोपी को आजीवन कठोर कारावास एवं एक लाख रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। प्रकरण में खास बात रही कि अभियोजन पक्ष के 2 गवाह पक्षद्रोही हुए वहीं आरोपी की ***** मृतका की पुत्री विमला ने आरोपी के पक्ष में बचाव पक्ष की तरफ से साक्ष्य दी लेकिन न्यायालय ने अपने निर्णय में व्याख्या करते हुए लिखा कि बचाव पक्ष के गवाह के कथन पूरी तरह से काल्पनिक है। जो कथन किए गए है वो साबित नहीं होते। मामले में परिस्थिति जन्य साक्ष्य आरोपी के विरुद्ध पूर्णतया साबित होते हैं। जब मृतका आरोपी से बचकर भागने के लिए गांव की तरफ जाने लगी तो आरोपी ने रास्ते में उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की। घटनास्थल एक सुनसान जगह थी जहां से घायल अवस्था में मृतका ने गांव की आबादी की तरफ भागना चाहा। साथ ही आरोपी की निशानदेही से पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार जमीन में दबाई हुई लाठी को बरामद किया है। आरोपी का आचरण भी संदिग्ध रहा है। वह पैसे के लिए अपनी मां के साथ अक्सर मारपीट करता था।

दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत एडीजे राजेंद्र चौधरी ने आरोपी को भादस. की धारा 302 के तहत दोषसिद्ध करार दिया। सजा के बिंदु पर निर्णय करते हुए न्यायाधीश राजेंद्र चौधरी ने लिखा कि नशे की लत के चलते आरोपी क्रोधी एवं आत्ममुग्ध स्वभाव का होना प्रकट होता है। अभियुक्त का कृत्य पूरी पारिवारिक व्यवस्था के प्रति बनी हुई सामाजिक धारणा को गंभीर खतरा पहुंचाने वाला है। जहां भारतीय समाज में जननी अर्थात माता को देवी का दर्जा दिया जाता है ऐसी स्थिति में अभियुक्त द्वारा अपनी ही माता की हत्या करके बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण एवं घृणित काम किया गया है। इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से पैरवी अपर लोक अभियोजक महेंद्र जैन ने की।