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छह महीने में जितनी सीटी स्कैन जांच, उससे ज्यादा तो अब छह सप्ताह में

हनुमानगढ़. कोरोना की दूसरी लहर में फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति पता करने के लिए सीटी स्कैन जांच का ग्राफ संक्रमण के मामलों की तरह तेज रफ्तार से बढ़ा है।

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छह महीने में जितनी सीटी स्कैन जांच, उससे ज्यादा तो अब छह सप्ताह में

छह महीने में जितनी सीटी स्कैन जांच, उससे ज्यादा तो अब छह सप्ताह में

छह महीने में जितनी सीटी स्कैन जांच, उससे ज्यादा तो अब छह सप्ताह में
- कोरोना की दूसरी लहर में तेज रफ्तार से बढ़ा सीटी स्कैन जांच का ग्राफ
- जिले के सात ब्लॉक मुख्यालयों में से केवल तीन पर ही जांच की व्यवस्था
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. कोरोना की दूसरी लहर में फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति पता करने के लिए सीटी स्कैन जांच का ग्राफ संक्रमण के मामलों की तरह तेज रफ्तार से बढ़ा है। सोनोग्राफी सेंटर पर हालात यह हैं कि जांच के लिए घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। यह स्थिति करीब पौने दो माह से है। रेडियोलॉजिस्ट के पास सीटी स्कैन जांच का कार्यभार पहले कभी भी इतना नहीं रहा। जांच केन्द्रों पर पहले छह महीने में जितने सीटी स्कैन किए जाते थे, उससे ज्यादा तो अब कोरोना की दूसरी लहर में कर दिए गए हैं।
खास बात यह कि जिले में सात ब्लॉक मुख्यालय हैं। मगर सीटी स्कैन जांच की व्यवस्था जिला मुख्यालय सहित केवल चार ही ब्लॉक में है। हनुमानगढ़ को छोड़कर शेष तीन ब्लॉक मुख्यालयों पर भी केवल एक-एक सोनोग्राफी सेंटर पर ही सीटी स्कैन जांच सुविधा है। जाहिर है कि जांच केन्द्र कम होने तथा रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण भीड़ जैसी स्थिति तो संबंधित सोनोग्राफी सेंटर पर होनी है। हालांकि जांच के लिए सरकार ने दरें तय कर रखी हैं। फिर भी कभी-कभार कुछ केन्द्रों पर अधिक राशि वसलूने को लेकर शिकायतें भी सामने आई हैं।
तो पकड़ी रफ्तार
जानकारी के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के इस तरह के भी मामले सामने आए जब रोगी की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई। मगर सीटी स्कैन जांच में संक्रमण का पता लगा। ऐसे में दूसरी लहर के दौरान जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश एवं देश भर में सीटी स्कैन जांच ने जोर पकड़ा। इसका असर यह रहा कि सोनोग्राफी सेंटर पर भीड़ लगने लगी। रेडियोलॉजिस्ट अति व्यस्त हो गए। अधिकांश जगहों पर सरकारी स्तर पर सीटी स्कैन जांच की व्यवस्था भी नहीं है। जिला मुख्यालय स्थित कई सोनोग्राफी सेंटर तो ऐसे भी हैं जिन्होंने एक दिन में पचास से भी अधिक सीटी स्कैन जांच की।
इसलिए भी ज्यादा जांच
बड़ी बात यह है कि लोगों ने संक्रमण के भय से बिना चिकित्सकीय परामर्श के ही सीटी स्कैन जांच करानी शुरू कर दी। यहां तक कि लोगों ने एक माह के भीतर ही दो से तीन बार तक यह जांच कराई। इसके चलते विशेषज्ञों ने यह चेतावनी भी दी कि बिना जरूरत, चिकित्सकीय परामर्श के बिना एवं अधिक बार सीटी स्कैन जांच कराना शरीर के लिए नुकसानदेह है।
अधिक राशि की शिकायत
जिले की संगरिया, पीलीबंगा एवं टिब्बी तहसील में तो किसी सोनोग्राफी सेंटर पर सीटी स्कैन जांच की व्यवस्था नहीं है। जबकि नोहर, रावतसर एवं भादरा में एक-एक केन्द्र है। बड़ी बात यह कि कई केन्द्रों पर दो हजार रुपए या इससे अधिक राशि लेने की भी शिकायतें हैं। जबकि सरकारी दर इससे बहुत कम है।
पहले ठप रहा कार्य
कोरोना की पहली लहर के दौरान अधिकांश केस में सीटी स्कैन जांच की जरूरत नहीं पड़ी थी। इसके अलावा सामान्य शल्य क्रिया आदि भी बंद रही। इस कारण पहली लहर में सोनोग्राफी जांच केन्द्रों में कामकाज ठप सा रहा। मगर दूसरी लहर में तो चिकित्सकों को सांस लेने की भी फुर्सत नहीं वाली स्थिति हो गई।