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मापदंड पूरे होने के बाद भी नोहर जिले की घोषणा नहीं होने से चौतरफा रोष

मापदंड पूरे होने के बाद भी नोहर जिले की घोषणा नहीं होने से चौतरफा रोष- दिन भर चलता रहा चर्चाओं का दौर, सोशल मीडिया पर सरकार की खिंचाई

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मापदंड पूरे होने के बाद भी नोहर जिले की घोषणा नहीं होने से चौतरफा रोष

मापदंड पूरे होने के बाद भी नोहर जिले की घोषणा नहीं होने से चौतरफा रोष

हनुमानगढ़. नोहर विधानसभा में वित्त एवं विनियोग विधेयक चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से डेढ़ दर्जन से अधिक जिलों की एक साथ की गई घोषणा के बावजूद नोहर को जिला नहीं बनाए जाने से चौतरफा रोष का माहौल है। राजनीतिक गलियारों से लेकर चौक-चौराहों तक में मापदंड पर खरा उतरने के बावजूद नोहर को जिला नहीं बनाए जाने पर आक्रोश देखने को मिला। सोशल मीडिया में तो इसे लेकर नागरिक राज्य सरकार से खासे नाराज नजर आए।

अधिकतर का तर्क है कि प्रदेश में उन्नीस नए जिलों की घोषणा में भी नोहर को शामिल नहीं किया जाता है तो आगे भला उम्मीद कैसे करें। शनिवार को सुबह से लेकर देर शाम तक गली-मोहल्लों से लेकर सार्वजनिक स्थलों बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि सभी जगहों पर यही चर्चा का विषय रहा। अधिकांश नागरिकों का कहना था कि नए जिलों के गठन में योग्यता को नजरअंदाज कर राजनीतिक हित का ध्यान रखा गया है। लेकिन यह न्यायोचित नहीं है। [नसं.]

जिला मुख्यालय से 175 किमी तक दूर
हनुमानगढ़ जिले के विस्तृत क्षेत्रफल व विषम भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देेनजर नोहर का जिला बनना सर्वथा उचित है। जिला बनने के निर्धारित मापदंडों पर नोहर खरा उतरता है। भौगोलिक, प्रशासनिक, जनसंख्या, क्षेत्रफल, संसाधनों आदि की दृष्टि से नोहर जिला बनने का सही हकदार प्रतीत होता है। कुछ गांव तो तहसील मुख्यालय से भी पचास किलोमीटर से अधिक दूरी स्थित हैं। ऐसे में जिला मुख्यालय से उनकी दूरी तो कई सौ किलोमीटर है। नोहर तहसील के गांव धानसिया, जबरासर, खुईयां, टीडियासर, जोखासर, पांडूसर जिला मुख्यालय से डेढ़ सौ से अधिक किमी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में यह गंाव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। तहसील के गांव विकास कार्यों की दौड़ में पिछड़ रहे हैं। राज्य सरकार की योजनाओं की महक तो इन गांवों तक पहुंच रही है। लेकिन इनका स्वाद यह गांव नहीं चख पा रहे हैं। कमोबेश यही हाल भादरा कस्बे के गांवों का है। यहां के भिरानी, डाबड़ी, झांसल जैसे गांव जिला मुख्यालय से करीब १७५ किमी से भी अधिक दूरी पर हैं। हनुमानगढ़ जिले के अंतिम छोर पर बसे इन गांवों से नोहर की दूरी सामान्यतया एक जैसी रहेगी। इसलिए नोहर को जिले के रूप में विकसित कर विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है।

अधिकांश सरकारी कार्यालय मौजूद
नोहर में अधिकांश सरकारी कार्यालय पहले से मौजूद हैं। यहां एएसपी, एडीएम सहित सभी प्रमुख सरकारी कार्यालय वर्षों से मौजूद हैं। इतना ही नहीं नोहर को जिला बनाने के लिए भादरा, रावतसर के साथ चुरू जिले के साहवा व तारानगर क्षेत्र को शामिल किया जा सकता है। नोहर तहसील में सैकड़ों गांव तथा चक में कुल ४७ ग्राम पंचायतें हैं। इसी प्रकार भादरा, रावतसर, तारानगर क्षेत्र की विकास से वंचित ग्राम पंचायतें नए जिले से जुड़ कर विकसित हो सकेंगी।

संघर्ष समिति की सभा आज, संघर्ष की रणनीति करेंगे तय
नोहर. जिला बनाओ संघर्ष समिति की ओर से रविवार को सुबह साढ़े १० बजे यहां भगतसिंह चौक पर विरोध प्रदर्शन कर आम सभा की जाएगी। इसमें उन्नीस नए जिले बनाने की घोषणा में नोहर का नाम शामिल नहीं होने को लेकर रोष प्रकट किया जाएगा। संघर्ष समिति की ओर से सभा में सभी दलों व आम नागरिकों को शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया गया है। सभा में नोहर को जिला बनाने की मांग को लेकर आगामी रणनीति तय की जाएगी।