
ना डॉक्टर ना नर्सिंगकर्मी, समझाइश व इलाज से ज्यादा ठुकाई पर जोर
ना डॉक्टर ना नर्सिंगकर्मी, समझाइश व इलाज से ज्यादा ठुकाई पर जोर
- अब बगैर पंजीयन नहीं चलाए जा सकेंगे नशा मुक्ति केन्द्र
- राजस्थान डीएडिक्शन सेंट्रल रूल्स के तहत कराना होगा पंजीकरण
- जिला स्तर पर आवेदनों की जांच के लिए होगा कमेटी का गठन
- नशे से बढ़े 'मुक्तिÓ के धंधे पर अब पैनी नजर, प्रारंभ होगा पंजीयन का 'पंजाब मॉडलÓ
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. नशे से उड़ते जिले को जमीन पर लाने के लिए नशा मुक्ति का धंधा भी जोर पकड़ चुका है। पिछले कुछ बरसों में ही धड़ाधड़ नशा मुक्ति केन्द्र खुल गए हैं। नशे की समस्या से ग्रस्त हनुमानगढ़ जिले में बढ़ते नशा मुक्ति के धंधे की अब कड़ी निगरानी होगी। अब तक स्पष्ट गाइडलाइन के अभाव में बिना पंजीकरण के संचालित नशा मुक्ति केन्द्रों को जल्दी ही पंजीयन की कड़ी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
इसके लिए शीघ्र राजस्थान डीएडिक्शन सेंट्रल रूल्स 2020 के तहत विस्तृत गाइडलाइन जारी होगी जो पंजाब मॉडल से प्रेरित होगी। क्योंकि वहां इस समस्या पर कई बरसों से काम हो रहा है। नए नियमों के तहत जिले से लेकर प्रदेश भर में संचालित नशा मुक्ति केन्द्रों को पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए जिला स्तर पर कलक्टर की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा। नए नियमों के तहत निर्धारित मापदंडों की पालना करते हुए नशा मुक्ति केन्द्रों का संचालन करना होगा। अब तक तो स्थिति यह है कि कुछेक संस्थाओं को छोड़ दें तो अधिकांश में ना तो नियमानुसार चिकित्सक है और ना ही नर्सिंग स्टाफ। काउंसलर का भी टोटा है। ऐसे में समझाइश, परामर्श व चिकित्सकीय लिहाज से नशा पीडि़तों का इलाज करने के बजाय प्रताडऩा, पिटाई व ठुकाई से ही नशा मुक्ति पर जोर दिया जाता है। इसका पुख्ता सुबूत यह है कि पिछले तीन साल में जिले के नशा मुक्ति केन्द्रों में प्रताडऩा व पिटाई से कई रोगियों की मौत हो चुकी है। नशा मुक्ति केन्द्रों के संचालक आदि पर हत्या के मामले तक दर्ज हो चुके हैं।
अब तक तय नहीं थी जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार अब तक स्थिति यह थी कि नशा मुक्ति केन्द्र खोलने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन नहीं थी। बस, पंजीकृत समाजसेवी संस्था या एनजीओ ही अपने स्तर पर नशा मुक्ति केन्द्र का संचालन शुरू कर देती। इस कारण नशा मुक्ति केन्द्रों का नियमित रूप से निरीक्षण भी नहीं हो पा रहा था। क्योंकि इसके लिए किसी भी विभाग की जवाबदेही तय नहीं थी। चिकित्सा विभाग, औषधि नियंत्रण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, सहकारिता विभाग, पुलिस आदि के बीच में निरीक्षण की जवाबदेही का मामला फुटबाल बना रहता था। अब राजस्थान डीएडिक्शन सेंट्रल रूल्स के तहत नियम-कायदे तय करते हुए निरीक्षण वगैरह के लिए जिला प्रशासन की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। जिला प्रशासन के निर्देश पर गठित कमेटी निरीक्षण से लेकर पंजीयन आवेदन की जांच आदि का कार्य कर सकेगी।
कमेटी करेगी जांच-पड़ताल
नशा मुक्ति केन्द्रों के संचालन, नियुक्ति, अनुरक्षण, प्रबंधन, परीक्षण व नशा रोगियों की पहचान, चिकित्सा, देखरेख, पुनर्वास आदि के लिए राजस्थान डीएडिक्शन सेंट्रल रूल्स बनाए गए हैं। इसके लिए नशा मुक्ति केन्द्रों का पंजीयन कराना होगा। सर्टिफिकेट अथोरिटी के रूप में राज्य स्तरीय कमेटी कार्य करेगी। इसके निर्देशन में जिला स्तर पर कलक्टर की अध्यक्षता में कमेटी का गठन होगा। नशा मुक्ति केन्द्र संचालकों को जिला स्तरीय कमेटी के समक्ष आवेदन करना होगा। मापदंडों की पूर्ति संबंधी जांच-पड़ताल यह कमेटी ही करेगी। इसके बाद जिला स्तरीय कमेटी आवेदन को राज्य स्तरीय कमेटी को भेज देगी।
नए मापदंड : यह होना जरूरी
- चार घंटे के लिए अंशकालिक चिकित्सक जो मनोविज्ञान में एमडी होना चाहिए या फिर एमबीबीएस व तीन माह का विशेष प्रशिक्षण हो।
- रोगियों की समझाइश के लिए विशेष योग्यताधारी काउंसलर होना चाहिए।
- 20 रोगी हो तो एक चिकित्सक तथा 40 रोगी हो तो दो चिकित्सक होने चाहिए।
- नियमित सेवाओं के लिए प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ जरूरी जो 1:20 होना चाहिए।
- सामाजिक कार्यकर्ता/परामर्शदाता 10 रोगियों पर एक होना जरूरी।
- वार्ड ब्वॉय, रसोईया, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आदि जरूरी। मनोरंजन व्यवस्था, आवास व पेयजल की पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए।
- जांच कक्ष, स्वागत कक्ष, पंजीयन काउंटर, वेटिंग रूम, व्यक्तिगत परामर्श कक्ष आदि होने आवश्यक।
जब आया केन्द्रों का काला सच सामने
नशा मुक्ति केन्द्रों के निरीक्षण की पुख्ता व्यवस्था नहीं होने के कारण गड़बड़झाले की शिकायतें निरंतर बढ़ रही है। जब कभी भी प्रशासन के विशेष निर्देश पर जिले में नशा मुक्ति केन्द्रों का निरीक्षण हुआ वहां खूब कमियां पाई गई। पहली व दूसरी लहर के लॉकडाउन के दौरान जब नशा मुक्ति केन्द्र जांचे गए तो वहां ना तो नर्सिंग स्टाफ मिला और ना ही चिकित्सक। संगरिया स्थित नशा मुक्ति केन्द्र के संचालकों व कर्मचारियों पर तो भर्ती रोगी की हत्या का मामला भी दर्ज हो चुका है। इसके अलावा रोगी से मारपीट व कुकर्म का प्रकरण भी दर्ज कराया जा चुका है। गत वर्ष टाउन स्थित नया सवेरा नशा मुक्ति केन्द्र में इलाज के नाम पर फर्जीवाड़े व नियम-कायदों के उल्लंघन का मामला सामने आया था। केन्द्र में भर्ती रोगियों का चिकित्सकों व काउंसलर की मदद से इलाज करने की बजाय उनको अमानवीय यातनाएं दी जा रही थी। क्योंकि चिकित्सक, काउंसलर वगैरह तो वहां नियुक्त ही नहीं किए गए थे। भादरा क्षेत्र में भी रोगी की केन्द्र में पिटाई से मौत हो चुकी है।
जल्दी प्रारंभ होगी प्रक्रिया
नए नियमों के तहत नशा मुक्ति केन्द्रों के पंजीयन व संचालन को लेकर राज्य स्तर से विस्तृत दिशा निर्देश जारी होंगे। फिर शीघ्रता से जिले में इस संबंध में कार्य कराया जाएगा। गत दिनों मुख्य सचिव के साथ बैठक में हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर एसपी ने नशा मुक्ति केन्द्रों के पंजीयन मापदंडों को लेकर चर्चा भी की थी। जिले में जल्दी ही नए मापदंडों की पालना की प्रक्रिया प्रारंभ कराई जाएगी। - नथमल डिडेल, जिला कलक्टर।
Published on:
24 Sept 2021 10:18 am
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