‘पानी उतरा’ तो पहुंचे अफसर, लिया फीडबैक
-आपदा प्रबंधन विभाग के शासन सचिव पीसी किशन ने किया हनुमानगढ़ का दौरा
-घग्घर नदी में पानी की तेज आवक होने पर जिला प्रशासन की ओर से की गई तैयारियों का लिया ब्यौरा
हनुमानगढ़. आपदा प्रबंधन, राहत एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के शासन सचिव पीसी किशन शनिवार को जिले के दौरे पर रहे। इस दौरान जिला कलक्ट्रेट सभागार में उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली। घग्घर नदी में पानी उतरने के बाद लगातार मंत्री व अफसर यहां पहुंच रहे हैं। पहले आपदा प्रबंधन मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने यहां पहुंचकर जायजा लिया था। अब आपदा प्रबंधन, राहत एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के शासन सचिव पीसी किशन भी शनिवार को जिले के दौरे पर पहुंचे। इस मौके पर पीसी किशन ने पिछले दिनों घग्घर नदी में पानी की अधिक आवक से बाढ़ की आशंका के ृदृष्टिगत प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों का ब्यौरा लिया। बैठक में बाढ़ के खतरे के बीच जिला प्रशासन की ओर से किए गए प्रबंधन की सराहना की। पीसी किशन ने बताया कि इस बार हरियाणा, हिमाचल प्रदेश पंजाब में अधिक बारिश हुई है। राजस्थान में भी पहले की अपेक्षा अधिक बारिश दर्ज की गई है। अधिक बारिश के कारण जिले में करीब 15 दिन तक बाढ़ का खतरा रहा। लेकिन इस स्थिति को जिला प्रशासन ने बेहतर तरीके से नियंत्रित किया और पानी का जीडीसी, नाली बेड, आईजीएनपी में बेहतर तरीके से प्रबंधन किया । जीडीसी और नाली बेड में क्षमता से अधिक पानी चलाया गया परंतु फिर भी नियंत्रण बनाए रखा। इससे पहले 1995 में इतनी अधिक मात्रा में पानी आने से बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी, लेकिन जिला प्रशासन ने इस मुश्किल घड़ी में अच्छा कार्य किया है। अब पानी घटने से खतरा टल गया है। बैठक में जिला कलक्टर रुक्मणि रियार, पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी, एडीएम प्रतिभा देवठिया, जिला परिषद सीईओ अशोक असीजा, एएसपी जस्साराम बोस, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता अमरजीत मेहरड़ा, एसई शिवचरण रेगर, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन अनिल अग्रवाल, डीएसओ विनोद ढाल, डीटीओ संजीव चौधरी, एसीएमएचओ रवि खीचड़ सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
एक महीने में मिलेगी आदान अनुदान की सहायता
मुख्य सचिव ने भी लगातार वीसी के जरिए हालातों का जायजा लिया। पीसी किशन ने बताया कि एसडीआरएफ के मापदंड केन्द्र सरकार तय करती है, दस्तावेजों में कमी रहने पर भुगतान नहीं हो पाता, इसके लिए तीन स्तर पर प्रक्रिया होती है। प्रथम स्तर में जिला कलक्टर द्वारा मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया होती है, जिला कलक्टर के स्तर पर कार्यवाही में दिक्कत आने पर आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग को प्रकरण स्थानांतरित किया जाता है। जहां विभाग की ओर से मुख्य सचिव के साथ बैठक कर स्वीकृति दिलवाई जाती है। पीसी किशन ने बताया कि अभी सर्वे किया जाना शेष है, उसके बाद ही पता चल पाएगा कि कितना नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों को कृषि आदान-अनुदान के तहत एक माह में उचित मुआवजा दिया जाएगा।
लगातार कम हो रहा पानी
हनुमानगढ़. घग्घर नदी में पानी की आवक लगातार घट रही है। ओटू हैड से शनिवार को 14900 क्यूसेक पानी राजस्थान के लिए प्रवाहित किया गया। इसी तरह नाली बेड में 5000 क्यूसेक पानी चल रहा था। इससे पहले गत सप्ताह तक नाली बेड में 7000 क्यूसेक से अधिक पानी चल रहा था। इससे नदी के बंधे टूटने की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन ग्रामीणों के सहयोग से जिला प्रशासन ने बंधों की निगरानी बनाए रखी। इससे बाढ़ का खतरा एक बार टल गया।