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छीन ली ‘जिला प्रमुखों’ की पावर

-शक्तियां बढ़ाने के एक सप्ताह बाद ही आदेश लिया वापस... -तबादलों को लेकर जिला प्रमुखों की बढ़ाई गई थी शक्तियां

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छीन ली 'जिला प्रमुखों' की पावर

हनुमानगढ़.

सरकार का पूरा ध्यान अभी तबादलों पर टिका हुआ है। कर्मचारी-अधिकारी अपने हिसाब से गोटियां फिट कर इच्छित स्थान पर जाने की जुगत में लगे हैं तो स्थानांतरण के बहाने सरकार भी राजनीतिक जमीन मजबूत बनाने के प्रयास में है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने पंचायतीराज विभाग के अधीन पांचों विभाग में अंतर जिला में तबादलों का अधिकार जिला प्रमुखों को देने को लेकर आदेश जारी किया।


पिछले पखवाड़े में उक्त आदेश जारी करने के बाद जिला प्रमुख व पंचायत समितियों ने अपने-अपने हिसाब से तबादले करने शुरू भी कर दिए। लेकिन अचानक सरकार ने अब पूर्व में जारी किए गए अपने आदेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। नए आदेश के अनुसार जिला परिषद व पंचायत समितियों की ओर से जारी तबादला आदेश उस कर्मचारी के पैतृक यानी मूल विभाग की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही जारी किए जाएंगे।


पावर गेम के बीच तबादलों को लेकर विभिन्न जिलों में असमंजस की स्थिति बन गई। जिला परिषद अधिकारियों के अनुसार पंचायतीराज विभाग को पूर्व में कृषि, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास, प्रारंभिक शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग हस्तांतरित किए गए थे। इसके तहत करीब चार हजार कर्मचारियों का जुड़ाव प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जिला परिषद से है। इस बारे में जिला प्रमुख का कहना है कि पंचायती राज विभाग को हस्तांतरित किए गए पांच विभागों में शिक्षा विभाग में तबादले अहम होते हैं। यह शिक्षण से जुड़ा हुआ है। संबंधित मूल विभाग की ओर से तबादला सूची का अनुमोदन करने की व्यवस्था से शिक्षण कार्य की गुणवत्ता बनी रहेगी।


भूले मूल भावना
पंचायतीराज संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर संविधान के 73 वें संशोधन की मूल भावना के अनुरूप वर्ष 2010 में आदेश जारी किया गया था। इसमें कृषि, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास, प्रारंभिक शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभागों के कार्यकलाप एवं स्टॉफ का हस्तांतरण पंचायतीराज संस्थाओं को किया गया था।


इस आदेश को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 11 जून 2018 को निर्देश जारी कर पंचायत समिति क्षेत्र के भीतर तबादले के अधिकार पंचायत समिति की प्रशासन एवं स्थापना स्थाई समिति व जिला परिषद क्षेत्र के भीतर स्थानांतरण के अधिकार जिला परिषद की प्रशासन एवं स्थापना स्थाई समिति को देने का निर्णय लिया। सरकार स्तर पर जिले से बाहर तबादले के अधिकार संबंधित कर्मचारी के मूल विभाग की सहमति से करने की व्यवस्था बनाई गई। लेकिन सरकार नई व्यवस्था पर एक पखवाड़े भी कायम नहीं रह सकी और उसे नियम बदलने पड़े। यानी मूल भावना पर सरकार एक माह तक भी नहीं टिकी।


पैतृक विभाग की स्वीकृति जरूरी
राज्य सरकार स्तर पर तबादले शुरू हो गए थे। इसके बाद जून के दूसरे पखवाड़े में जिला परिषद को अपने अधिकार क्षेत्र में तबादले के अधिकार दे दिए गए। तबादले सुचारू रूप से चलते रहें, इसे देखते हुए सरकार ने अब जिला परिषद को दिए गए तबादलों के सीधे अधिकार वापस लेकर मूल यानी पैतृक विभाग की स्वीकृति से तबादले करने के आदेश दिए हैं।
कृष्ण चोटिया, जिला प्रमुख हनुमानगढ़