23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मायड़ भाषा के मान-मान्यता वास्ते चला रहे ‘बरत्यूं अभियान’

हनुमानगढ़. मायड़ भाषा राजस्थानी को मान्यता दिलाने की मांग को लेकर कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं और कई प्रकार की मुहिम चलाई जा रही है।

2 min read
Google source verification
मायड़ भाषा के मान-मान्यता वास्ते चला रहे ‘बरत्यूं अभियान’

मायड़ भाषा के मान-मान्यता वास्ते चला रहे ‘बरत्यूं अभियान’

मायड़ भाषा के मान-मान्यता वास्ते चला रहे ‘बरत्यूं अभियान’
- राजस्थानी भाषा मान्यता की मुहिम को मजबूत करने एवं मायड़ का मान बढ़ाने के लिए चला रहे अभियान
- बहलोलनगर में बैनर, पोस्टर, होर्डिंग आदि में हो रही राजस्थानी भाषा इस्तेमाल
हनुमानगढ़. मायड़ भाषा राजस्थानी को मान्यता दिलाने की मांग को लेकर कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं और कई प्रकार की मुहिम चलाई जा रही है। इन सबके बीच जिले के गांव बहलोलनगर में मायड़ भाषा के मान-मान्यता वास्ते कुछ अलहदा कोशिशें की जा रही हैं। यूं कहा जाए कि ज्यादा जमीनी प्रयास किए जा रहे हैं। मायड़ भाषा के हेताळू हरीश हैरी के नेतृत्व में ग्रामीणों की ओर से विशेष ‘बरत्यूं अभियान’ चलाया जा रहा है।
इसके तहत राजस्थानी को व्यवहार में इस्तेमाल करते हुए पहले स्वयं के स्तर पर मान्यता देने का आह्वान लोगों से किया जा रहा है। मतलब मायड़ भाषा को ‘पेली आपरे जीवन मांय बरत्यूं री भासा बणार मानता देवण रो प्रयास। राजस्थानी भाषा को व्यवहार की भाषा बनाकर मान्यता देने वाले गांवों में सबसे आगे है बहलोलनगर। गांव की आबादी करीब 5000 है। यहां के लोग राजस्थानी भाषा के प्रति जागरुक हैं। यहां की दुकानों सहित अन्य प्रतिष्ठानों के बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स से लेकर दीवारों पर नारा लेखन वगैरह में भी केवल राजस्थानी भाषा ही काम में ली जा रही है। निमंत्रण के कार्ड, स्वागत बैनर, शोक संदेश, जागरण, धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजन से लेकर क्रिकेट कॉमेंट्री, मंच संचालन तक सब कुछ राजस्थानी में ही होता है। कोई भी आयोजन राजस्थानी भाषा के बिना पूरा नहीं होता। बाहर से आने वाले लोग भी यहां राजस्थानी में छपे बैनर ही लगाते हैं। गोशाला की गाड़ी पर राजस्थानी लिखी हुई है और राजस्थानी धमाल बजाकर राजस्थानी की मान्यता की मांग उठाई जाती है। पंचायत भी राजस्थानी की मान्यता के लिए पेंटिंग, नारे और सूचनाएं राजस्थानी में ही देती है।
यूं हुई शुरुआत
राजस्थानी भाषा वास्ते कई वर्षों से काम कर रहे हरीश हैरी ने आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी अभियान के जरिए कार्य की शुरुआत अपने गांव से की। राजस्थानी में छपे बैनर पोस्टर को सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरे गांवों तक पहुंचाया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्वीटर पर आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी पेज बनाकर हजारों बैनर, पोस्टर राजस्थानी में अपलोड कर रहे हैं। गांव के लोग भी अब राजस्थानी में बैनर पोस्टर आदि छपवा रहे हैं। अब तक 300 से ज्यादा दुकानों के बैनर, पोस्टर आदि राजस्थानी में छपवाए गए हैं। गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों की मातृभाषा भी शाला दर्पण पोर्टल पर राजस्थानी ही दर्ज है।
जन की भाषा बन उभरे
मायड़ भाषा भीरी हरीश हैरी कहते हैं कि जो भाषा केवल कविता और कवि सम्मेलन तक ही सीमित थी, वह अब जन-जन की भाषा बनकर उभरी है। राजस्थानी भाषा पर किसी एक आदमी का पेटेंट नहीं होना चाहिए। इसलिए स्वयं को राजस्थानी भीरी कहलाना पंसद करते हैं। राजस्थानी की मान्यता के लिए काम करने वाला हर व्यक्ति राजस्थानी भीरी है। कुलदीप राजपुरोहित के साथ मिलकर अब तक हजारों बैनर बना चुके हैं। मगर कभी भी इन बैनरों पर अपनी फोटो या नाम नहीं लगाया। वह इसलिए कि हर आदमी उन्हें शेयर कर सके। क्योंकि फोटो लगाने से राजस्थानी का बैनर व्यक्तिगत हो जाता है जिसे आगे कोई शेयर नहीं करता। राजस्थानी को व्यवहार की भाषा बनाकर सबसे पहले खुद मान्यता देवें। इसकी शुरुआत अपने घर से ही की जाए।

बड़ी खबरें

View All

हनुमानगढ़

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग