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हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलगाड़ी के इंजन का हुक दो बार खुला,बड़ा हादसा टला

- गंभीर लापरवाही : हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलखंड पर रेलवे की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल- दो बार हुक खुला, इंजन आगे चला गया, रेलगाड़ी पीछे रह गई- अटक गई रेलयात्रियों की सांसें, हो सकता था बड़ा हादसा- बाल-बाल बचे सैकड़ों यात्री- रेलवे तकनीकी शाखा की गंभीर चूक

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हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलगाड़ी के इंजन का हुक दो बार खुला,बड़ा हादसा टला

हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलगाड़ी के इंजन का हुक दो बार खुला,बड़ा हादसा टला

-मनोज कुमार गोयल
हनुमानगढ़. हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलखड़ पर टिब्बी के पास रविवार सुबह बड़ा रेल हादसा टल गया। बताया गया कि हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलगाड़ी के इंजन का हुक रविवार सुबह एक नहीं दो बार खुल गया और इंजन आगे चला गया तथा रेलगाड़ी पीछे रह गई। गनीतम रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। इससे रेलगाड़ी भारी विलम्ब से नोहर पहुंची। इस कारण यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलगाड़ी (०४७६४) रविवार सुबह 6.40 बजे हनुमानगढ़ से रवाना हुई। यह गाड़ी करीब दस किलोमीटर ही चली थी कि शेरेकां रेलवे स्टेशन से कुछ किलोमीटर पहले रेलगाड़ी के इंजन का हुक खुल गया और रेलगाड़ी पीछे रह गई तथा इंजन आगे चला गया। इंजन का हुक खुलने और रेलगाड़ी के पीछे रह जाने का अहसास होने पर चालक दल ने इंजन (पावर) को रोका। लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद जैसे-तैसे रेलगाड़ी के कोच व पावर को जोड़ कर रेलगाड़ी गतंव्य को रवाना हुई। लगभग दस-बारह किलोमीटर चलने के पश्चात तलवाड़ा झील रेलवे स्टेशन के पास पुन: इंजन का हुक खुल गया और रेलगाड़ी फिर पीछे रह गई और इंजन आगे चला गया। इस पर सामने से आ रही रेलगाड़ी का पावर मंगवा कर रेलगाड़ी को नोहर पहुंचाया गया। चलती रेलगाड़ी के इंजन का हुक दो बार खुलने से बड़ा हादसा टल गया। रेलगाड़ी का इंजन खुलने से रेलगाड़ी पीछे रह जाने पर सवार यात्रियों में हड़कम्प मच गया। रेलवे ने जांच के आदेश दिए हैं।

रेलगाड़ी के इंजन का हुक तीस किमी की दूरी में दो जगह खुला
टिब्बी. हनुमानगढ़-सादुलपुर पैसेंजर ट्रेन के रविवार सुबह टिब्बी क्षेत्र में करीब तीस किमी की दूरी के बीच दो जगह इंजन का हुक खुल जाने से डिब्बे पीछे रह गए जबकि इंजन आगे चला गया। इसके बाद में इसका पता लगने पर इंजन को वापस पीछे ले जाकर डिब्बों को जोड़ा गया। इससे रेलगाड़ी करीब दो घंटे लेट हो गई। यात्रियों से मिली जानकारी के अनुसार पहली बार हनुमानगढ़-शेरेका तथा दूसरी बार टिब्बी-तलवाडा झील के बीच इंजन का हुक खुलने से इंजन डिब्बों को छोड़कर आगे चला गया। बाद में चालक को इसकी जानकारी मिली तो उसने इंजन को बैक किया तथा वापस डिब्बों को जोडा। तब जाकर रेलगाड़ी ऐलनाबाद पहुंची। ऐलनाबाद रेलवे स्टेशन हुए क्रासिंग के दौरान सादुलपुर से पहुंची रेलगाड़ी का इंजन श्रीगंगानगर-सादुलपुर रेलगाड़ी के लगाकर तथा सादुलपुर से आई रेलगाड़ी के खराब हुक वाला इंजन लगाकर इंजन को वापस हनुमानगढ़ भेजा गया। रेलगाड़ी में सवार यात्री खिनानियां निवासी बंशी कासनियां तथा शेरेकां निवासी अशोक कुमार के अनुसार हनुमानगढ टाउन व शेरेकां तथा टिब्बी से तलवाड़ा झील के बीच इंजन का हुक खुलने के बाद वापस जोडऩे के चलते रेलगाड़ी करीब दो घंटा लेट हो गई। टिब्बी में रेलगाडी करीब २५ मिनट देरी से पहुंची तथा तलवाड़ा झील के पास हुक खुलने व जोडऩे में ज्यादा समय लगा। ऐलनाबाद में इंजन को बदलने में भी समय लगने के कारण सादुलपुर से आई रेलगाड़ी भी करीब एक घंटा लेट हो गई। जिससे रेलगाड़ी में सवार यात्रियों को परेशानी हुई।

नोहर में दो घंटे देरी से पहुंची ट्रेन, यात्री हुए हलकान
नोहर. श्रीगंगानगर से सादुलपुर यात्री गाड़ी (संख्या ०४७६४) के तलवाड़ा के पास हुक खुलने की घटना के चलते यहां सुबह ८ बजकर १७ मिनट पर पहुंचने वाली उक्त गाड़ी करीब दो घंटे की देरी से १० बजे पहुंची। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार गाड़ी के इंजन के हुक का लॉक खुलने के कारण गाड़ी के सारे डिब्बे पीछे छूट गए। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने नया पावर (इंजन) भेजकर यात्री गाड़ी को तलवाड़ा से सादुलपुर की ओर रवाना किया। इस घटना से हुई देरी के चलते रेलवे स्टेशन पर बैठे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अनेक यात्री तो देरी के चलते रेल का सफर टालते हुए बस व अन्य वाहनों से गंतव्य की ओर रवाना हो गए। [नसं.]


गंभीर चूक, होनी चाहिए उच्च स्तरीय जांच
हनुमानगढ़. हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलखंड पर एक ही दिन में थोड़े-थोड़े अंतराल पर एक ही रेलगाड़ी के इंजन (पावर) का हुक दो बार खुल जाना और स्पीड पर चल रही रेलगाड़ी का पीछे रह जाना एवं इंजन का आगे चला जाना रेलवे और उसकी परिचालन व तकनीकी शाखा की गंभीर चूक को दर्शाता है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए तथा जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। रखरखाव और निगरानी के अभाव में इंजन का हुक दो बार खुला और इससे सैकड़ों यात्रियों के जीवन को खतरे में पड़ गया। यह तो गनीमत रही कि हादसा नहीं हुआ और जनहानि टल गई। वरना इस तरह के हादसे में रेलगाड़ी पटरी से उतर सकती थी, पलट सकती थी। दोनों स्थितियों में कितनी बड़ी जनहानि होती सोच कर रूह कांपती है। रेलवे की कार्यप्रणाली बहुत सुनियोजित है, निश्चित तौर पर रेल गाड़ी चलने से पहले हर तरह की जांच होती है, ऐसे में हनुमानगढ़-सादुलपुर रेलगाड़ी के संचालन के लिए भी जिम्मेदारी निर्धारित है तो फिर यह चूक हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। ताकि घटना की पुनरावृति नहीं हो।