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जिला अस्पताल के एनआईसीयू में नहीं वेंटिलेटर, कई माह पहले भेजी थी डिमांड, अभी भी इंतजार

जिला अस्पताल के एनआईसीयू में नहीं वेंटिलेटर, कई माह पहले भेजी थी डिमांड, अभी भी इंतजार हनुमानगढ़. एक तरफ तो जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके निर्माण के लिए केंद्र व राज्य सरकार करीब तीन सौ करोड़ रुपए खर्च करेगी।

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जिला अस्पताल के एनआईसीयू में नहीं वेंटिलेटर, कई माह पहले भेजी थी डिमांड, अभी भी इंतजार

जिला अस्पताल के एनआईसीयू में नहीं वेंटिलेटर, कई माह पहले भेजी थी डिमांड, अभी भी इंतजार

वेंटिलेटर की जरूरत होने पर नवजात को किया जाता है रैफर
-केवल सीपेप से ऑक्सीजन देने की सुविधा
हनुमानगढ़. एक तरफ तो जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके निर्माण के लिए केंद्र व राज्य सरकार करीब तीन सौ करोड़ रुपए खर्च करेगी। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल के एनआईसीयू में नवजात के इलाज के लिए वेंटिलेटर की सप्लाई अभी तक नहीं भेजी है। काफी समय पहले अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग जयपुर को डिमांड भेजी थी। लेकिन अभी तक जिला अस्पताल के एनआईसीयू यूनिट के लिए वेंटिलेटर नहीं मिल पाया है। इसकी वजह से प्रसव के नवजात की स्थिति गंभीर होने पर हायर सेंटर या फिर प्राइवेट अस्पताल में रैफर किया जाता है। एनआईसीयू में केवल सी पेप की सुविधा की है। इस सी पेप के जरिए प्रेशर से नवजात को ऑक्सीजन दी जाती है। नवजात स्वत: ऑक्सीजन लेने में सक्षम नहीं होने पर वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। यही स्थिति जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड की है। बच्चा वार्ड में भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। इसकी डिमांड भी भेजी जा चुकी है। लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं मिल पाई है।

यही स्थिति प्राइवेट अस्पतालों की
जिले के सरकारी अस्पताल तो दूर प्राइवेट अस्पताल में ही बच्चों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा तक नहीं हुई। प्राइवेट अस्पतालों में केवल नवजात बच्चों के इलाज के लिए वेंटिलेटर की सुविधा है, इनकी संख्या भी सीमित है। एक माह तक के नवजात को वेंटिलेटर पर भर्ती किया जाता है। वहीं एक माह से अधिक वाले शिशु के लिए वेंटिलेटर की सुविधा नहीं हैं। शिशु को इलाज के लिए परिजन पास के जिले में लेकर जाते हैं।

तीस बेड ऑक्सीजन, दस वेंटिलेटर
जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस की थर्ड वेव की आशंका के कारण जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में तीस बेड पर ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पर्याप्त साधन होने चाहिए और दस के करीब वेंटिलेटर की सुविधा भी होनी चाहिए।

इन्होंने भी भेजी थी डिमांड
दो माह पहले सीएमएचओ विभाग की ओर से बच्चों के बेहतर इलाज के लिए 40 वेंटिलेटर की डिमांड भेजी गई थी। लेकिन अभी तक इन्हें भी सप्लाई नहीं मिली है।