
sumit won gold medal
संगरिया. 'कहते हैं मंजिल की राहों में पड़ाव आते हैं, मगर लगातार चलने का हौसला रखने वाले जांबाजों के रास्तों में तो मंजिले बेखौफ आती हैं। ऐसे जज्बे का नाम है वार्ड तेरह निवासी सुमित सोनी। खामोश आवाज व श्रवण बाधित होने पर भी कुछ कर गुजरने के जुनून में वो चले जा रहा है उस पथ पर, जहां से लक्ष्य तक पहुंचने का अटूट विश्वास है। सुमित ने ऑल इंडिया स्पोर्ट्स कौंसिल ऑफ डफ दिल्ली की ओर से 1 दिसंबर से 6 दिसंबर तक रांची में आयोजित 22वीं नेशनल गेम्स ऑफ डफ जूडो (73 किलोग्राम) में गोल्ड मेडल जीता है।
जिसमें देशभर से पहुंचे खिलाडिय़ों में से राजस्थान के चार खिलाड़ी थे। सोमवार सुबह घर पहुंचने पर उसका स्वर्णकार समाज के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सोनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष पूर्व मंत्री केसी बिश्रोई, पार्षद अनिल भोबिया, जगदीश, पूर्व पार्षद दर्शन सोनी, राजकुमार, अमरनाथ पेंटर, राजेश पासवान, अमित सोनी, विजय, विनोद, संजीव गर्ग व अन्य ने माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया। मिठाई बांटकर खुशी जताई।
उत्साह से जीत संभव
मंदबुद्धि बच्चों की सहायता में हर किसी के लिए आगे बढऩा चाहिए। सामान्य बच्चों के साथ पूरे अधिकार व व्यवहार करने से उनमें हीनभावना समाप्त होगी और कुछ करने का जज्बा आएगा। ये कहना है स्वर्ण पदक विजेता मूक-बधिर सुमित सोनी का। अटल विश्वास उत्साह के साथ वह ओलंपिक में कुश्ती स्पद्र्धा के लिए जाना चाहता है। सुमित इशारों में व लिखकर बताते हैं कि जूडो के लिए परिवार का पूरा सहयोग मिलता है। वार्ड तेरह निवासी पिता पूर्व पार्षद संजीव सोनी तथा मां सुमन ने उसे ट्रेनिंग के लिए नेशनल स्पोर्ट्स स्कूल पटियाला भेजा।
कोच रिकूं जयपुर से कुश्ती तथा कर्मजीतसिंह अमृतसर से जूडो का प्रशिक्षण लिया। संजीव सोनी बताते हैं कि वह बचपन में असमर्थ नहीं था। १३ दिन बाद ही बिगड़े निमोनिया से उसकी दुनिया में खामोशी छा गई। इलाज के बावजूद वह मूक-बधिर रह गया। उसने दिल्ली से बीसीए की शिक्षा ली। तीन साल पूर्व मूक-बधिर मनप्रीतकौर से शादी हुई। वह आर्मी में कार्यरत है। उसके दो भाई अमित, कपिल तथा एक चिकित्सक सपना सोनी है।
जीते मैडल
सौ से अधिक मेडल जीत चुके सुमित ने श्री जगदंबा मूक बधिर अंध विद्यालय से आठवीं तक पढ़ा। आईजोल (मिजोरम) २००७ में ५३वीं नेशनल जूडो में कांस्य पदक, लुधियाना के डीफ चिल्ड्रन स्कूल में पढ़ते वक्त१७वीं राष्ट्रीय मूक-बधिर ओलंपिक प्रतियोगिता में जेवलिन थ्रो [भाला फेंक] में गोल्ड मेडल, दो बार रजत पदक, पांचवी राष्ट्रीय मूक बधिर कुश्ती २०१० अजमेर में फ्री स्टाइल व ग्रीकोरोमन में दो स्वर्ण पदक, २०१३ मेंं लाहौर व बहावलपुर (पाकिस्तान) से दो गोल्ड मेडल, तीन बार नेशनल अवार्ड, जनवरी 2016 नेशनल गेम्स ऑफ डीफ की ग्रीको रोमन कुश्ती प्रतियोगिता में सिल्वर पदक, १४ से १८ जनवरी १७ को स्कोरिश हाई इंटरनेशनल स्कूल गुरुग्राम में बेस्ट जूडो को-ब्वॉयज पांचवी नेशनल ब्लाइंड एंड डीफ जूडो चेंपियनशिप में प्रथम रहकर स्वर्ण पदक जीता। बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड, जूडो-कराटे, बास्केट बॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, कबड्डी, २०० व ३०० मीटर दौड़, ऊंची कूद, डिस्कस थ्रो में कई पुरस्कार ले चुका। यूरो कंट्री बुलगारिया में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।
Video: धरती ने ओढ़ी पीली चुनरिया
Published on:
11 Dec 2017 03:58 pm
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