बरसात में सेहत के प्रति थोड़ी लापरवाही भी बीमारी का कारण बन सकती है। खासकर खाने को लेकर की गई अनदेखी आपको बीमार बना सकती है। आज हम बताएंगे कि बारिश के मौसम में किस तरह का खानपान होना चाहिए ताकि आपको कोई परेशानी न हो।
इस मौसम में गेहूं, मक्का, जौ, बेसन जैसे साबुत सूखे अनाज और दालों को अपने भोजन में शामिल करना बेहतर है। प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम वाला डाइट लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। इस मौसम में आसानी से मिलने वाले भुने भुट्टे के सेवन से पर्याप्त फाइबर मिलता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के लिए वरदान है। आहार में सूखे मेवों को शामिल करना भी जरूरी है।
अगर बात करें मौसमी सब्जियों और फलों की तो हरी पत्तेदार सब्जियों की बजाय हल्की और सुपाच्य सब्जियां जैसे घीया, तोरई, टिंडा, भिंडी, बीन्स खाना चाहिए। इसके साथ ही करेला, मूली, मेथी जैसी कड़वी सब्जियां संक्रमण से बचाती हैं। भोजन में अदरक, लहसुन, पुदीना, धनिया, काली मिर्च, हल्दी, हींग, मेथी दानों का उपयोग पाचनशक्ति को बढ़ाने में फायदेमंद है। इस मौसम में सलाद नहीं खाना चाहिए। अगर सलाह खाते भी हैं तो उबाल कर खाना चाहिए। एंटी ऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर खीरे के सेवन से कब्ज, अपच जैसे पेट के संक्रमण में फायदा होता है।
इसी तरह अगर हम बात करें फलों की तो मौसमी, अमरूद, आंवला, नाशपाती, पपीता, स्ट्रॉबेरी, आम, सेब, अनार, केला जैसे विटामिन सी से भरपूर फलों को खाना चाहिए। इनमें मौजूद पौष्टिक और एंटीऑक्सीडेंट तत्व न केवल शरीर में ऊर्जा संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये शरीर से विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालते हैं। इससे संक्रमण से बचाव होता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है।
वैसे तो गर्मी के दिनों में चाय-कॉफी के लिए मना किया जाता है लेकिन बारिश में हर्बल या ग्रीन चाय, कॉफी, वेजीटेबल सूप जैसे गर्म पेय का सेवन शरीर को ऊर्जा से भर देता है। ये बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस से बचाव करते और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।