
work stress in the office
Office Stress in Women's : बदलती जीवनशैली में कार्यस्थल पर अधिकतर कर्मचारी काम के तनाव (Stress) से जूझ रहे हैं। ऑफिस से घर पहुंचने के बाद भी यह तनाव (Stress) बना रहता है। इस तनाव से सबसे अधिक पीड़ित युवा व महिलाएं हैं। मेंटल एंड इमोशनल वेलनेस कंपनी के नवीनतम अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है।
यह भी तथ्य आया है कि कार्यालयों में तनावग्रस्त कर्मचारियों की संख्या साल दर-साल बढ़ती जा रही है। अध्ययन में पाया गया कि कार्यस्थल पर 21 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के युवा और पुरुषों की तुलना में महिलाओं में काम का तनाव (Office Stress) अधिक होता है। जयपुर के मनोचिकित्सक केंद्र में रोजाना 15 से 20 मरीज तनावग्रस्त होकर पहुंच रहे हैं। इनमें कामकाजी महिलाएं ज्यादा हैं।
महिलाओं में : कामकाज और जीवन में संतुलन नहीं होना। कम मनोबल, आलोचना का डर, जजमेंट, शिफ्ट बदलना।
पुरुषों में : कार्यस्थल पर लगातार बदलाव से पुरुष कर्मचारियों में तनाव के हालात मिले, रिमोट और हाइब्रिड वर्क कल्चर भी कारण।
Office Stress in Women's : जयपुर में मानसरोवर निवासी रूपाली गर्ग आठ वर्ष से जॉब कर रही हैं। शादी के बाद काम और घर दोनों में संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा था। ऑफिस में कोई गलती होती तो महिला हो कहकर आलोचना करने लगते थे। इससे धीरे-धीरे अवसाद (Depression) का शिकार होने लगी। कुछ ही महीनों में मुझे जॉब छोड़नी पड़ी। अब सेहत में सुधार है।
महिला - 72.2 उच्च स्तर के तनाव से ग्रस्त
पुरुष - 53.65% उच्च स्तर के तनाव से ग्रस्त
जिम्मेदारी को संतुलित करने में संघर्ष
महिला -18%, पुरुष - 12%
हमेशा उदास रहने की बात
महिला - 20%, पुरुष - 9.27%
लगातार और लंबे तनाव (Stress) में रहने से शरीर में अधिक मात्रा में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) भी बनने लगता है, जिससे शरीर में मोटापा, कोलेस्ट्रॉल, बीपी, शुगर जैसी बीमरियों का खतरा बना रहता है। इसी के साथ एकाग्रता की कमी, डिप्रेशन और एंग्जाइटी बढ़ने लगती है। धर्मदीप सिंह, मनोरोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक केंद्र, जयपुर
Published on:
25 Jul 2024 04:49 pm
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