
संगीत वास्तव में एक थैरेपी है। न्यूरोकेमेस्ट्री अनुसन्धान के अनुसार संगीत से रोग कंट्रोल में होते हैं। यह कई दर्द निवारक दवाओं से ज्यादा कारगर माना जाता है। कनाडा स्थित मेकगिल विश्यविद्यालय के स्नायु विज्ञान (न्यूरोसाइंस) विशेषज्ञ एवं एक समय के रॉक-संगीतकार डेनिएल लैवीटीन का कहना है कि संगीत भावनात्मक जीवन में एक रूपक का काम करता है। संगीत से भावना बेहतर पैदा होती है।
संगीत ग्रंथियों में उत्तेजना पैदा करता है, जो नर्वस सिस्टम और रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है। अच्छा और उपयुक्त संगीत रिलेक्स करता है और तरोताजा रखता है। संगीत सुनने से गुस्सा जैसे नकारात्मक पहलू भी दूर रहते हैं।
संगीत सिरदर्द, पेट संबंधी विकार दूर करता है। म्यूजिक थैरेपी से भावनाओं, ब्लड प्रेशर पर काबू रखने और लीवर के कार्यो को सुचारू रूप से चलाने में भी मदद मिलती है। यह बात सौ फीसदी सही है कि बीमार हैं, तो गीत-संगीत आपको ठीक कर सकता है।
वेस्टर्न आटारियो यूनिवर्सिटी (कनाडा) में हुए एक शोध में यह सामने आया है। गीत-संगीत सुनने या गाने-बजाने से न सिर्फ बीमारी जल्दी ठीक होती है बल्कि तनाव भी कम होता है। गीत-संगीत से याददाश्त भी सुदृढ़ होती है और भूलने की बीमारी अलजाइमर में भी लाभ होता है। नए शोध के अनुसार गाने से गले के पिछले भाग में स्थित मांसपेशियां सुदृढ़ होती हैं। खर्राटे, श्वांस रोग व
अन्य गले संबंधी परेशानियों में भी लाभ होता है।
शोधकर्ताओं ने गीत-संगीत को धूम्रपान छुड़ाने में भी सहायक माना है। परकिंसन, अन्य मूवमेंट डिसऑर्डर, ट्रॉमेटिक, स्ट्रोक, एक्यूट एंड क्रोनिक पेन, डिप्रेशन जैसी बीमारियों में म्यूजिक थैरेपी बहुत मददगार साबित होती है। संगीत शरीर में खुश रहने वाले केमिकल सिरोटिन की मात्रा बढ़ाता है।
मेलबोर्न स्थित रॉयल टैलबोट रिहैबिलिटेशन अस्पताल में संगीत चिकित्सक जेनेटी टेम्प्लिन का कहना है कि यदि किसी कारणवश मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है और मनुष्य कुछ सोच नहीं पाता, तो ऐसे में संगीत की मदद से दोबारा सामान्य जीवन जीने की चाह पैदा की जा सकती है।
इसके अलावा संगीत मस्तिष्क के भिन्न भागों में जाकर मनुष्य को चिंतामुक्त करता है। जिंदगी में हम सब जो कुछ करते हैं, वो संगीत की धुन पर आधारित होता है।
विशेषज्ञ यह मानते हैं कि मनुष्य के दिमाग में चल रही कई तरह की रासायनिक क्रियाओं के बीच संतुलन साधने का काम भी संगीत करता है। संगीत और नृत्य जैसी विधाओं की सहायता से सामान्य स्वास्थ्य से लेकर कैंसर, ऑटिज्म आदि कई तकलीफों में राहत मिल सकती है। दुनियाभर में चिकित्सक संगीत और डांस का प्रयोग कई तरह के रोगियों के इलाज के लिए कर रहे हैं।
डांस की ही तरह स्वरलहरियों का भी असर दिमाग और उसके जरिए फिर शरीर पर भी पड़ता है। यही कारण है कि गर्भावस्था में शिशु और मां की सेहत के लिहाज से संगीत सुनने की सलाह डॉक्टरों द्वारा भी दी जाती है।
Published on:
03 Apr 2015 06:37 am
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