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कान के नीचे हैं अगर इस तरह की लकीरें तो हो सकती है दिल की बीमारी

देश में हर साल हृदय रोग से करीब 17 लाख लोग जान गवां देते हैं। अन्य लक्षणों के अलावा मानव के कान को देखकर भी दिल की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

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Amanpreet Kaur

Sep 17, 2018

hearth disease

hearth disease

देश में हर साल हृदय रोग से करीब 17 लाख लोग जान गवां देते हैं। अन्य लक्षणों के अलावा मानव के कान को देखकर भी दिल की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। एक शोध में खुलासा हुआ है कि डायगनल इयरलोब क्रीज (कान के निचले हिस्से पर तिरछी लकीर या सिकुडऩ) का सीधा संबंध दिल की बीमारियों से होता है।

95 फीसदी लोग, जिनके कान में गंदगी भरी होती है यानी जिन्हें कान की बीमारी होती है, वे हृदय रोग से भी पीडि़त होते हैं। मुंबई के रहने वाले डॉ. बावसकर ने मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीडि़त 888 मरीजों पर शोध किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि इयरलोब क्रीज वाले 95 फीसदी लोग हृदय रोग से भी पीडि़त थे। दरअसल, कान की नसें शरीर की कई नसों से जुड़ी होती हैं। दिल की नसें भी उन्हीं में से हैं।

बिना लक्षण दिखाए भी आ सकता है हार्ट अटैक

देश में हर साल होने वाली असमय मौतों में लगभग 50 प्रतिशत मौतें बगैर लक्षण वाले दिल के दौरों के कारण होती हैं। इसे चिकित्सा शब्दावली में असिम्टोमैटिक हार्ट अटैक कहा जाता है। सामान्य दिल के दौरे में छाती में तेज दर्द, बाहों, गर्दन और जबड़े में तेज दर्द, अचानक सांस लेने में परेषानी, पसीना और चक्कर आना, जैसे लक्षण होते हैं। जबकि इसके विपरीत एसएमआई के लक्षण बहुत कम और हल्के होते हैं, और इसलिए इसे लेकर भ्रम हो जाता है और लोग इसे नियमित रूप से होने वाली परेशानी मानकर इसे अक्सर अनदेखा कर देते हैं। इसके लिए अधिक उम्र, पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान या तंबाकू चबाना, उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, वजन संबंधित समस्याएं, शारीरिक गतिविधि की कमी जिम्मेदार हो सकते हैं। आरामतलब जीवनशैली, खाने की खराब आदतें और शारीरिक गतिविधि की कमी का मोटापे से संबंध है और इससे दिल की समस्याएं पैदा होती हैं। अब युवा पीढ़ी में भी दिल से संबंधित ये बीमारियां बढ़ रही हैं।