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Winter Care : सर्द हवाओं से सिकुड़ती है सांस नली

सर्दी का मौसम खानपान के लिहाज से अच्छा माना जाता है। इस दौरान भूख भी बढ़ती है और पाचनतंत्र भी सक्रिय हो जाता है। लेकिन बात यदि सेहत की करें तो ऐसे व्यक्ति जिन्हें हृदय, जोड़ व मांसपेशियों संबंधी समस्याएं हैं उन्हें खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। सर्दी में ठंडक के कारण सांस नली व रक्त वाहिनियों के सिकुडऩे से दमा, अस्थमा, जोड़ों में दर्द, त्वचा व एलर्जी संबंधी समस्या के अलावा हृदय रोगी को काफी दिक्कतें होने लगती हैं।

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Divya Sharma

Nov 02, 2019

Winter Care : सर्द हवाओं से सिकुड़ती है सांस नली

Winter Care : सर्द हवाओं से सिकुड़ती है सांस नली

10 में से एक अस्थमा रोगी भारत में। विश्व में करीब 15 करोड़ और भारत में 1.5 करोड़
5-10 मिनट वार्मअप जरूर करें आउटडोर एक्टिविटी करने से पहले, शरीर लचीला होगा
10 हजार कदम औसतन रोजाना चलने का प्रयास करें। धीरे-धीरे बढ़ा सकते
20 मिनट की रोजाना ऐरोबिक्स एक्सरसाइज फायदेमंद है आर्थराइटिस रोगियों के लिए

वातावरण में सर्द हवाओं के बीच धुएं और प्रदूषण के कण घुल जाते हैं। इस कारण ये पूरी तरह से ऊपर नहीं जा पाते हैं। ये एलर्जन्स बनकर अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की स्थिति को गंभीर कर देते हैं।
हृदयरोगी गुनगुनी धूप लें
ऐसे व्यक्ति जिन्हें सुबह के समय सैर करना पसंद है और हृदय रोग से भी पीडि़त हैं। वे अपने टहलने का समय थोड़ा आगे कर सकते हैं। तड़के सुबह ठंडी हवा के बीच टहलने के बजाय गुनगुनी धूप के बीच या शाम के समय सैर करें। ठंड से रक्तवाहिनियां सिकुड़ जाती हैं जिसका असर सीधे हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों पर पड़ता है। इससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। चाहें तो घर पर ही टे्रडमिल वॉक या हल्की फुल्की एक्सरसाइज कर सकते हैं।
हाथ न धोने से बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ता
रोग प्रतिरोधक क्षमता जिनकी कमजोर होती है उन्हें इस मौसम में बार-बार सर्दी, जुकाम व खांसी की शिकायत होती है। सर्दी में लोग ठंडे पानी से बार-बार हाथ धोने से कतराते हैं। हाथों पर मौजूद वायरस व बैक्टीरिया खाने-पीने की चीजों के साथ शरीर में पहुंचकर संक्रमण करते हैं। साफ-सफाई का ध्यान रखें और इम्युनिटी बढ़ाने वाली चीजों को नियमित रूप से अपनी डाइट में लें।
आउटडोर एक्टिविटी
शरीर का ज्यादा मूवमेंट न होने से जोड़ों में अकडऩ और दर्द बढ़ सकता है। ऐसे में यदि नियमित एक घंटे एक्सरसाइज, वॉक, जॉगिंग, योग-ध्यान करेंगे, फुटबॉल, बास्केटबॉल, क्रिकेट खेलेंगे तो रोग प्रतिरोधकता बढ़ेगी। इस दौरान प्यास और भूख भी खूब लगती है। इस तरह की गतिविधि के बाद खाने से शरीर को पूरा पोषण मिलता है।
हाल ही सर्जरी हुई है तो...
हड्डी, मांसपेशियों या किसी अंग संबंधी सर्जरी हुई है तो खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। जोड़ और मांसपेशी की अकडऩ दूर करने के लिए फिजियोथैरेपी की मदद लें। साथ ही ज्यादा चलना-फिरना नहीं होता है तो ऐसा खानपान लें जिससे कब्ज की समस्या न हो। नियमित दवा लेने के अलावा डॉक्टरी परामर्श पूर्ण रूप से अपनाएं। सर्जरी के ५-६ दिन बाद चलना-फिरना धीरे-धीरे शुरू करे वर्ना अकडऩ बढ़ सकती है।
फल खाने की आदत
बदलती आदतों के कारण बहुत लोग फल कम या नहीं खाते हैं। ऐसा न करें। कोशिश करें कि रोजाना एक मौसमी फल जरूर खाएं। जूस के बजाय फल साबुत खाएं, इससे फाइबर की पूर्ति होगी। फलों को रात में खाने से बचें।
ध्यान रखें
फ्रिज में रखी चीजें तुरंत न खाएं। भोजन को गर्म ही खाएं। नेचुरल चीजों को प्रयोग में लेने की कोशिश करें। प्रोसेस्ड चीजों के प्रयोग से भी बचें।
इन 3 बातों पर दें ध्यान
1. तापमान गिरने की वजह से दिनचर्या में बदलाव के दौरान इन गतिविधियों को बंद न करें
2. सर्दी महसूस होने से लोग पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं, जो कि गलत है। सादा या गुनगुना कर कम से कम 8-10 गिलास पानी रोज पीएं।
3. सर्दी बढऩे से आउटडोर एक्टिविटी बंद न करें। शरीर में लचीलापन और फुर्ती बनी रहेगी।सर्दी के मौसम में रोगी परहेज की चीजों को भी खा लेते हैं। इससे बचें, दिक्कत बढ़ सकती है।
एक्सपर्ट : डॉ. आदर्श वाजपेयी, फिजिशियन, भोपाल

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