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Human Lifespan Research: अब इंसान जिएगा 150 साल? एंटी-एजिंग टेक्नोलॉजी से बदल सकता है भविष्य

Human Lifespan Research: क्या इंसान 150 साल तक स्वस्थ रहकर जी सकता है? Nature जर्नल, एपिजेनेटिक क्लॉक और एक्सपर्ट्स की राय जानिए इस खास रिपोर्ट में।

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भारत

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Dimple Yadav

Jan 30, 2026

Human Lifespan Research

Human Lifespan Research (Photo- gemini ai)

Human Lifespan Research: क्या कोई इंसान 150 साल तक जिंदा रह सकता है और वो भी अच्छी सेहत के साथ? यह सवाल आजकल वैज्ञानिकों के बीच खूब चर्चा में है। मशहूर साइंस जर्नल Nature ने इसे एक तरह से कल्पना जैसी बात बताया है। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान लंबी उम्र की दिशा में एक बड़े वैज्ञानिक बदलाव के करीब है। लेकिन असली चिंता यह है कि इतनी लंबी जिंदगी में सेहत और आजादी बनी रहेगी या नहीं।

Nature की रिसर्च क्या कहती है

Nature में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, बीसवीं सदी में लोगों की औसत उम्र बढ़ी जरूर है, क्योंकि इलाज और दवाएं बेहतर हुईं। लेकिन यह साफ नहीं है कि इक्कीसवीं सदी में भी उम्र बढ़ने का यही ट्रेंड जारी रहेगा या नहीं। यानी सवाल सिर्फ उम्र बढ़ने का नहीं, बल्कि यह भी है कि आगे जाकर शरीर कितना साथ देगा।

150 साल की उम्र का दावा कहां से आया

उम्र पर रिसर्च करने वाले मशहूर वैज्ञानिक स्टीव होर्वाथ का मानना है कि तेजी से बढ़ रही एंटी-एजिंग टेक्नोलॉजी की वजह से इंसान भविष्य में 150 साल तक जी सकता है। उन्होंने एपिजेनेटिक क्लॉक नाम की तकनीक विकसित की है, जिससे यह मापा जा सकता है कि शरीर असल में कितना बूढ़ा हो चुका है।

एपिजेनेटिक क्लॉक क्या होती है

एपिजेनेटिक क्लॉक डीएनए मेथिलेशन पर आधारित होती है। आसान शब्दों में समझें तो यह डीएनए में होने वाले छोटे-छोटे केमिकल बदलावों को देखकर शरीर की बायोलॉजिकल उम्र बताती है। कई बार यह उम्र हमारी असली उम्र से कम या ज्यादा हो सकती है।

एक्सपर्ट्स की राय क्या है

पुणे की फंक्शनल न्यूट्रिशनिस्ट मुग्धा प्रधान कहती हैं कि डीएनए मेथिलेशन उम्र को समझने का एक अहम तरीका है, लेकिन यही पूरी तस्वीर नहीं है। इंसान की उम्र और सेहत पर गट हेल्थ, पोषण, स्ट्रेस, नींद, सूजन और लाइफस्टाइल जैसे कई फैक्टर असर डालते हैं।

उम्र बढ़ रही है, सेहत घट रही है?

आज की मेडिकल सुविधाओं से लोग ज्यादा साल तक जिंदा रह पा रहे हैं, लेकिन कई बार दूसरों पर निर्भर होकर। ऐसे में उम्र तो बढ़ती है, पर हेल्थस्पैन यानी अच्छे स्वास्थ्य के साल कम हो जाते हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक अब सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि सेहत बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

हेल्थस्पैन क्यों है ज्यादा जरूरी

आर्टेमिस हॉस्पिटल के डॉ. अंशुल सिंह कहते हैं कि लॉन्ग लाइफ का मतलब सिर्फ ज्यादा साल जीना नहीं, बल्कि ज्यादा साल एक्टिव, एनर्जेटिक और मानसिक रूप से मजबूत रहना है। अगर इंसान चल-फिर सके, सोच साफ रहे और बीमारियों से दूर रहे, तभी लंबी उम्र का मतलब बनता है।

असली लंबी उम्र क्या है

मुग्धा प्रधान के मुताबिक, सच्ची लंबी उम्र वही है जिसमें इंसान 80-90 या 100 की उम्र में भी आत्मनिर्भर हो, उद्देश्य के साथ जिए और समाज के काम आए। सिर्फ जिंदा रहना नहीं, बल्कि अच्छी तरह जीना ही असली उपलब्धि है।

भविष्य में क्या संभव है

वैज्ञानिक मानते हैं कि 150 साल की उम्र पाना शायद भविष्य में संभव हो, लेकिन इसके लिए जीन थेरेपी, रीजेनरेटिव मेडिसिन और सेल रिपेयर में बड़े बदलाव जरूरी होंगे। फिलहाल यह एक उम्मीद है, न कि पक्की सच्चाई।

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