
Monkey Fever (image- gemini)
Monkey Fever: निपाह वायरस का कहर अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि अब 'मंकी फीवर' ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में इस बीमारी से हुई पहली मौत से यह बात तो साफ है कि इस बीमारी का प्रकोप बरकरार है। यह बीमारी मुख्य रूप से बंदरों में पाए जाने वाले पिस्सुओं और किलनियों के काटने से फैलती है और यही कारण है कि इसे मंकी फीवर के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कि यह बीमारी क्या होती है और इसके कारण, लक्षण व बचाव के उपाय क्या हैं।
यह एक प्रकार का वायरल बुखार होता है जो फ्लेविवायरस (Flavivirus) के कारण होता है। इसकी पहचान सबसे पहले 1957 में कर्नाटक के क्यासानूर जंगलों में हुई थी। यह मुख्य रूप से बंदरों को प्रभावित करता है और उनके जरिए इंसानों तक पहुंचता है।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
30 Jan 2026 02:03 pm

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