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ये लक्षण बताएंगे आप हो सकते हैं हार्ट अटैक के शिकार, इस तरह से करें बचाव

हर साल WHO वर्ल्ड हार्ट डे के ज़रिये लोगों में ह्रदय रोग के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करता है। क्योंकि हृदयाघात के लक्षणों को जानना हर किसी के लिए जरूरी है।

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balram singh

Oct 01, 2016

heart attack indications

heart attack indications

दिल हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ये तो हम सभी जानते हैं। परंतु क्या हम अपने दिल की महत्वपूर्णता को जानते हुए भी इसका खयाल रखते हैं ? शायद नहीं। “आज के आधुनिक लाइफस्टाइल और अनियमित आहार के कारण 30 से 40 साल की उम्र में ही लोगों को दिल के रोग होने लगे हैं। यह समस्या इतनी आम हो चुकी है की हर परिवार में कोई न कोई सदस्य ह्रदय रोग से ग्रस्त है। यही नहीं बल्कि अब तो छोटी उम्र के बच्चे भी इस बीमारी का शिकार होते जा रहे हैं।

भारत में ख़राब लाइफस्टाइल, तनाव, एक्सरसाइज ना करने और अनियमित फूड हैबिट्स की वजह से लोगों को दिल से संबंधित गंभीर रोग होने लगे हैं। हृदय रोग, दुनिया में मृत्यु और विकलांगता का प्रमुख कारण है, और ह्रदय रोगों के कारण हर साल किसी और रोग की तुलना में अधिक मौतें होती हैं। इसीलिए यह बेहद ज़रूरी है की हम अपने हृदय की सेहत का ख़ास ख्याल रखे और स्वस्थ जीवन व्यतीत करें।

स्‍वस्‍थ शरीर के लिए स्वस्थ दिल का होना बहुत जरूरी है, इसलिए दिल के प्रति लापरवाही बिलकुल भी नहीं बरतना चाहिए। एक बार हार्ट अटैक झेल चुके हृदय के मरीजों को अत्यन्त सावधानी के साथ अपनी जीवन शैली में बदलाव अपनाने चाहिये। कई बार लोग इतने लापरवाह होते हैं की उन्हें पता ही नहीं होता है की उनके दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएं, कैसा लाइफस्टाइल अपनाएं।

यही कारण है की हर साल WHO वर्ल्ड हार्ट डे के ज़रिये लोगों में ह्रदय रोग के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करता है। क्योंकि हृदयाघात के लक्षणों को जानना हर किसी के लिए जरूरी है। कई बार इसके लक्षण इतने सामान्य दिखते हैं कि इन्हें मामूली दर्द समझा जाता है। परंतु वो कितना घातक है इसका अंदाजा लोगों को नहीं होता है। इसीलिए यह बेहद ज़रूरी है की हम अपने हृदय की सेहत का ख़ास ख्याल रखे और स्वस्थ जीवन व्यतीत करे” बताते है डॉ राकेश कुमार टंडन, मेडिकल डायरेक्टर, पी.एस.आर.आई. दिल्ली।

हृदय रोगों के प्रकार

कोरोनरी धमनी रोग: जिसे कोरोनरी हृदय रोग या हृदय (Heart) रोग भी कहा जाता है, हृदय रोगों में बेहद आम बात है। यह बीमारी धमनियों में मैल जमा होने के कारण होती है, जो हृदय में रक्त के बहाव को रोक कर हृदय विफलता और स्ट्रोक के ख़तरे को बढ़ा देता है।

हाइपरटेंसिव ह्रदय रोग: यह उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हृदय रोग है। उच्च रक्तचाप दिल और रक्त वाहिकाओं को भारी कर देता है,जिसके परिणामस्वरूप दिल की बीमारियां होती है।

रूमेटिक ह्रदय रोग: यह बीमारी रुमैटिक फीवर से जुडी हुई है। यह एक ऐसी अवस्था है, जिसमें हृदय के वाल्व एक बीमारी की प्रक्रिया से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। यह प्रक्रिया स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया के कारण गले के संक्रमण से शुरू होती है। यदि इसका इलाज नहीं किया जाये, गले का यह संक्रमण रुमेटिक बुखार में बदल जाता है। बार-बार के रुमेटिक बुखार से ही रुमेटिक हृदय रोग विकसित होता है। रुमेटिक बुखार एक सूजनेवाली बीमारी है, जो शरीर के, खास कर हृदय, जोड़ों, मस्तिष्क या त्वचा को जोड़नेवाले ऊतकों को प्रभावित करती है।

जन्मजात हृदय रोग: यह रोग जन्म के समय हृदय की संरचना की खराबी के कारण होती है। जन्मजात हृदय की खराबियां हृदय में जाने वाले रक्त के सामान्य प्रवाह को बदल देती हैं। जन्मजात हृदय की खराबियों के कई प्रकार होते हैं जिसमें मामूली से गंभीर प्रकार तक की बीमारियां शामिल हैं।

हृदय रोग के कारण-

-कोलेस्ट्रॉल बढ़ना

-ध्रूमपान

-शराब पीना

-तनाव

-आनुवांशिकता (हेरेडिटेरी)

-मोटापा

-उच्च रक्तचाप

हृदय रोग के लक्षण बताते है डॉ अमर सिंघल, सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट एंड हेड डिपार्टमेंट, कार्डियोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट। दिल की बीमारी के शुरूआती लक्षण जिन्हें समय से पहले जान गंभीर दिल की बीमारियों से बचा जा सकता है। जैसे :-

छाती में बेचैनी महसूस होना- यदि आपकी आर्टरी ब्लॉक है या फिर हार्ट अटैक है तो आपको छाती में दबाव महसूस होगा और दर्द के साथ ही खिंचाव महसूस होगा।

मतली, हार्टबर्न और पेट में दर्द होना- दिल संबंधी कोई भी गंभीर समस्या होने से पहले कुछ लोगों को मितली आना, सीने में जलन, पेट में दर्द होना या फिर पाचन संबंधी दिक्कतें आने लगती हैं।

हाथ में दर्द होना- कई बार दिल के रोगी को छाती और बाएं कंधे में दर्द की शिकायत होने लगती है। ये दर्द धीरे-धीरे हाथों की तरफ नीचे की ओर जाने लगता हैं।

कई दिनों तक कफ होना- यदि आपको काफी दिनों से खांसी-जुकाम हो रहा है और थूक सफेद या गुलाबी रंग का हो रहा है तो ये हार्ट फेल का एक लक्षण है।

सांस लेने में दिक्कतें होना – सांस लेने में दिक्कतें होना या फिर कम सांस आना हार्ट फेल होने का बड़ा लक्षण है।

पसीना आना- सामान्य से अधिक पसीना आना खासतौर पर तब जब आप कोई शारीरिक क्रिया नहीं कर रहे तो ये आपके लिए एक चेतावनी हो सकती है।

पैरों में सूजन- पैरों में, टखनों में, तलवों में और एंकल्स में सूजन आने का मतलब ये भी हो सकता है कि आपके हार्ट में ब्लड का सरकुलेशन ठीक से नहीं हो रहा।

हाथ-कमर और जॉ में दर्द होना- हाथों में दर्द होना, कमर में दर्द होना, गर्दन में दर्द होना और यहां तक की जॉ में दर्द होना भी दिल की बीमारियों का एक लक्षण हो सकता है।

चक्कर आना या सिर धूमना- कई बार चक्कर आने, सिर धूमने, बेहोश होने, बहुत थकान होने जैसे लक्षण भी एक चेतावनी हैं।

बचाव

आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रताप चौहान, डायरेक्टर जीव आयुर्वेद बताते है की आयुर्वेद की सहायता से भी आप अपने हृदय को स्वस्त रख सकते है। एमा दिल की बीमारियों का मुख्य कारण है। एमा विषाक्त पदार्थ है जो भोजन न पचने से बनता है। इसलिए व्यक्ति को ये सुनिश्चित कर लेना चाहिए की जितनी मात्रा में वह खाना खा सकता है और जिस प्रकार का खाना वह पच सकता है बस वही खाना खाये।

मौसमी फल और ताजा सब्ज़ियां (उबली या पकी हुई), मौसमी फल और ताजा सब्जियों (उबले हुए या पकाया),होलमील रोटी या ब्रेड , सलाद, स्प्रोउट, सब्ज़ियों का सूप, छाछ, पनीर , कम मात्रा में ताजा दूध और घी आदि खाद्य वस्तुओं को चुनने के लिए एक आदर्श सूची बनाते हैं। कोई भी मीठा कम मात्रा में लिया जाना चाहिए। शहद और गुड़ चीनी से ज़्यादा स्वस्थ हैं।

आवला दिल के लिए बहुत फायदेमंद है। यह ताजा लिया जा सकता है या फिर संरक्षित या पाउडर के रूप में भी ले सकते हैं ।

एक सप्ताह में कई बार तेल की या तेल के सिर की मालिश बहुत फायदेमंद है। सप्ताह में एक बार तेल के साथ पूरे शरीर की मालिश करना भी अच्छा है।

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