
शिशु का कमरा बहुत अधिक गरम या बहुत अधिक ठंडा नहीं होना चाहिए। कमरे का तापमान 27 से 30 डिग्री के बीच होना चाहिए। इससे कमरे में ऑक्सीजन और नमी की कमी होगी तो उसे सांस लेने में तकलीफ के साथ उल्टी और दस्त की भी शिकायत हो सकती है।
बच्चों की तकलीफ जड़ से खत्म करती
बदलते मौसम के साथ बच्चों में होने वाली बीमारियों का होम्योपैथी में सटीक इलाज है। बच्चों के संक्रमण का कारण जानने के बाद उन्हें दवाएं दी जाती हैं। इसमें मुख्य रूप से संक्रमण से बचाव के लिए एकोनाइट, कफ के साथ सर्दी जुकाम में हेपरसेल्फ, फेरमफेस जबकि बुखार के लिए बेलीडोना की डोज देते हैं। इन दवाओं की मदद से बच्चों की तकलीफ जड़ से खत्म हो जाती है।
ये सात सावधानियां जरूरी
1- बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा बिलकुल न दें
2- बच्चे की तकलीफ 24 घंटे से अधिक है तो डॉक्टर से मिलें
3- बच्चा जब खांसे तो नाक-मुंह पर रूमाल लगाएं
4- संक्रमण के बाद बच्चे को स्कूल बिलकुल न भेजें
5- बच्चे का कपड़ा बदलते रहें, शरीर को साफ करते रहें
6- बच्चे को जिस बर्तन में खाना पानी दे रहें उसे साफ रखें
7- यूरिन करता है तो तुरंत डायपर बदलें, संक्रमण नहीं होगा
एक्सपर्ट : डॉ. सुचिता क्षत्रिय, होम्योपैथिक एक्सपर्ट
Published on:
22 Dec 2019 06:20 pm

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