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Winter Sleeping: कंबल से निकलने का मन नहीं करता? जानें सर्दियों में ज्यादा नींद आने के वैज्ञानिक कारण

Winter Sleeping: सर्दियों में धूप की कमी के कारण मेलाटोनिन हार्मोन बढ़ जाता है, इस कारण हमें नींद और आलस ज्यादा आता है। आईए जानते हैं कि क्या-क्या कारण है जिनसे हमें सर्दियों के समय ज्यादा नींद आती है और इनसे बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए।

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भारत

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Nidhi Yadav

Jan 24, 2026

Winter Sleeping

Winter Sleeping (photo - gemini)

Winter Sleeping: आपने गौर किया होगा कि सर्दियों का मौसम शुरू होते ही हमें बहुत ज्यादा नींद आने लगती है और कुछ काम करने का मन भी नहीं करता। यहां तक कि कंबल से निकलकर एक गिलास पानी लाने में भी हमें मुश्किल होती है। हमें लगता है कि यह बस सर्दी का प्रभाव है लेकिन वास्तव में इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं।

असल में होता यह है कि सर्दी के मौसम में दिन छोटे होने लगते हैं और सूरज की रोशनी कम मिलती है, इससे हमारे शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी सर्काडियन रिदम (circadian rhythm) प्रभावित होती है। इस बदलाव के कारण हमारा सोने और जागने का समय बिल्कुल बदल जाता है। आईए जानते हैं कि सर्दियों में इतनी नींद क्यों आती है, इसके क्या-क्या कारण हैं और इससे बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए।

सर्दियों में ज्यादा नींद आने के कारण (Winter Sleeping Reason)

1. मेलाटोनिन हार्मोन का बढ़ना- सर्दियों में हमारे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती और इसी के कारण हमारे शरीर में मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनने लगता है। मेलाटोनिन हार्मोन को "स्लीप हार्मोन" भी कहा जाता है। मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हार्मोन है जो मुख्य रूप से आपके मस्तिष्क में स्थित पीनियल ग्रंथि द्वारा निर्मित होता है। यह हमारी नींद को नियंत्रित करता है। इसके ज्यादा बनने के कारण ज्यादा देर तक सोने के बाद भी शरीर में नींद और आलस बना रहता है। जो लोग घर के अंदर रहते हैं और बाहर कम निकलते हैं, उनमें इस हार्मोन का प्रभाव ज्यादा बढ़ जाता है।

2.विटामिन डी की कमी- सर्दियों में हम लोग सर्दी से बचने के लिए गर्म कपड़े अधिक पहनते हैं, जिससे धूप में निकलने पर भी शरीर को विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता। विटामिन डी हमारे शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। इसकी कमी से थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस होती है। इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (Seasonal Affective Disorder - SAD) में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसमें उदासी और सुस्ती ज्यादा महसूस होती है, और ज्यादा नींद आती है।

3.कमरे का तापमान- अच्छी और आरामदायक नींद के लिए हमारे कमरे का तापमान सही होना बहुत जरूरी है। अगर कमरे में बहुत ज्यादा ठंड या बहुत ज्यादा गर्मी है, तो नींद बार-बार टूट सकती है, जिससे सुबह उठने पर भी हमें थकान महसूस होती है। इसलिए कमरे का तापमान सामान्य बनाए रखना चाहिए। इसके साथ ही नियमित समय पर सोने और जागने की आदत बनाए रखनी चाहिए। यह भी नींद के चक्र को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है और इससे थकान दूर होती है।

4.आहार में बदलाव- हमारी खान-पान की आदतें भी बहुत हद तक हमारी नींद को प्रभावित करती हैं। सर्दियों में हम भारी और कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर भोजन ज्यादा खाते हैं। यह खाना पचने में ज्यादा समय लेता है और शरीर को सुस्त बना देता है। यही कारण है कि खाना खाते ही दिन में भी नींद आने लगती है। आलस और ज्यादा नींद से बचने के लिए ओट्स, दलिया, दाल और हरी सब्जियों जैसे हल्के, संतुलित और एनर्जेटिक आहार खाना चाहिए। सर्दियों में हमें प्यास कम लगती है लेकिन फिर भी हमें पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।

सर्दियों में अधिक नींद और सुस्ती से बचने के उपाय (Tips to Reduce Sleep In Winter)

  1. सुबह के समय धूप में टहलें।
  2. नियमित रूप से व्यायाम करें।
  3. सोने से पहले कमरे का तापमान सामान्य रखें।
  4. संतुलित और हल्का भोजन करें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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