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कुरुक्षेत्र के सीयासी रण में जातीय समीकरण साध पाए तो अर्जुन भेद सकते है चक्रव्यूह!

भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवारों को झेलना पड़ रहा विरोध, अर्जुन के पिता अभय लड़ चुके कुरुक्षेत्र से चुनाव...

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arjun chautala

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(कुरुक्षेत्र,हिसार): कुरुक्षेत्र की धरती महाभारत की लड़ाई के लिए विख्यात है। महाभारत का युद्ध अपनों के बीच हुआ था। इस बार लड़ाई देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में पहुंचने की है। चुनावी महाभारत के एक छोर पर भाजपा के नायब सिंह सैनी हैं तो दूसरे छोर पर कांग्रेस के निर्मल सिंह। बीच में अर्जुन सिंह चौटाला राजनीतिक चक्रव्यूह भेदने की भूमिका में हैं। नायब सिंह सैनी मनोहर कैबिनेट में मंत्री हैं तो निर्मल सिंह पूर्व में मंत्री रह चुके हैं। ताऊ देवीलाल की चौथी पीढ़ी के रूप में अर्जुन सिंह चौटाला महाभारत का रण जीतने के लिए आतुर नजर आ रहे हैं।


कुरुक्षेत्र में महाभारत की लड़ाई हुई थी, तब दो पक्ष आमने-सामने थे, लेकिन अब 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां मुकाबला कई पक्षों में होने वाला है। फिलहाल कुरुक्षेत्र का जो सियासी माहौल है, उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि भिड़ंत दिलचस्प होने वाली है। कुरुक्षेत्र लोकसभा के अंदर दिलचस्प पहलू यह है कि यहां सर्वाधिक जाट मतदाता हैं, लेकिन लंबे समय से इस समुदाय का कोई सांसद नहीं बना है। जबकि 1977 में कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट का गठन हुआ था और 2014 में पहली बार यहां से भाजपा को जीत मिली। इस बार परिस्थितियां पूरी तरह से विपरीत हैं।

२०१४ के चुनाव में भाजपा से बागी हो चुके राजकुमार सैनी ने कांग्रेस पार्टी से दो बार लगातार सांसद रह चुके उद्योगपति नवीन जिंदल को भारी मतों से हराया था। इस बार सैनी चुनाव नहीं लड़ रहे और उन्होंने भाजपा को अलविदा कहकर लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी बना ली। तब इनेलो के बलबीर सैनी को 25 फीसदी वोट के साथ कुल 2,88,376 वोट मिले थे। 2004 और 2009 में कुरुक्षेत्र से सांसद रहे कांग्रेस के नवीन जिंदल को 2,87,722 वोट मिले थे। जिंदल तीसरे नंबर पर रहे थे। 2004 में कुरुक्षेत्र से अर्जुन सिंह चौटाला के पिता अभय सिंह चौटाला भी चुनाव लड़ चुके हैं। कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में साढ़े 4.75 लाख से ज्यादा जाट और जट सिख, करीब एक लाख सैनी और सवा लाख ब्राह्मण वोटर हैं।


यह फैक्टर बढ़ा रहा अर्जुन की ताकत

अर्जुन सिंह चौटाला का रिश्ता यमुनानगर के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह की बेटी के साथ हुआ है। अर्जुन सिंह चौटाला जाट है और उनका रिश्ता जट सिख परिवार में इनेलो के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह की बेटी के साथ हुआ है इस चुनाव में यदि जाट और जट सिख मतदाता एक होकर मतदान करेंगे तो अर्जुन सिंह चौटाला को इसका लाभ मिलेगा काबिले गौर है कि बाहर से आए निर्मल सिंह जट सिख है। कुरुक्षेत्र संसदीय सीट पर यदि जाट और जट सिख मतदाता एकजुट हो गए तो इस महाभारत में अर्जुन भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।


बीजेपी उम्मीदवार को बाहरी होने का नुकसान

भाजपा ने यहां नायब सिंह सैनी को उतारा है, जिन्हें बाहरी होने का नुकसान हो रहा है। इसी तरह कांग्रेस ने यहां निर्मल सिंह को टिकट दिया है, जिनका भी बाहरी के तौर पर विरोध हो रहा है। हरियाणा में देवी लाल का परिवार कहीं से भी चुनाव लड़ता रहा है इस परिवार ने हरियाणा से बाहर जाकर भी चुनाव लड़े हैं जबकि निर्मल सिंह और नायब सिंह सैनी को यहां बाहरी होने का नुकसान होगा। अर्जुन सिंह चौटाला के पिता अभय चौटाला चूंकि कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ चुके, इसलिए लोग उन्हें स्वीकार करने को तैयार नजर आ रहे हैं। जजपा-आप गठबंधन ने यहां से जयभगवान डीडी को टिकट दिया है।

सीट का राजनीतिक इतिहास

कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट का गठन 1977 में किया गया था, इससे पहले यह क्षेत्र कैथल लोकसभा में अंदर में आता था। इस सीट पर कांग्रेस को 1984, 1991, 2004 और 2009 में जीत मिली। लोकसभा क्षेत्र कुरुक्षेत्र के अंदर कुल 9 विधानसभा क्षेत्र हैं. जिसमें लाडवा, शाहाबाद, थानेसर, पिहोवा, रादौर, गुहला, कलायत, कैथल और पुंडरी विधानसभा क्षेत्र आते हैं। कुरुक्षेत्र के रण में अर्जुन सिंह चौटाला दूसरे उम्मीदवारों पर हर लिहाज से भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।