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दस साल की नौकरी, वेतन 8 हजार, फिर भी 280 कर्मियों को निकला दिया

Haryana: विरोध में धरने पर बैठे

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दस साल की नौकरी, वेतन 8 हजार, फिर भी 280 कर्मियों निकला दिया

दस साल की नौकरी, वेतन 8 हजार, फिर भी 280 कर्मियों निकला दिया

बावल. बावल के औद्योगिक क्षेत्र स्थित जापानी कम्पनी सिहरोकी टेक्रिको इंडिया में पिछले 10 वर्षों से मात्र 8 हजार के वेतन पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। कंपनी से निकाले गए 280 कर्मियों के समक्ष रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। मजबूर होकर उन्होंने कंपनी के समक्ष दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया है।
धरने पर बैठे पीडि़त कर्मचारी धर्मेंद्र, यशबीर, अशोक, यशपाल, धीरज, जोगिंद्र, अजीत कुमार आदि ने कहा कि गुरुग्राम के मानेसर स्थित प्लांट से 225 कर्मियों को बावल की कंपनी में शिफ्ट कर दिया गया था। तभी से ये कर्मचारी इतने कम वेतन पर भी काम करने का मजबूर थे। कंपनी प्रबंधकों व श्रम विभाग के हवा सिंह के बीच 8 बिंदुओं पर सहमति बनी थी। कंपनी खूब मुनाफा कमा रही है। इसके बावजूद उन्हें स्थाई करने की बजाय निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दीवाली के बाद जब कर्मचारियों को लेने के लिए बसें नहीं पहुंची तो उनमें आशंक पैदा हुई। वे जब अपने साधनों से बुधवार को कंपनी में पहुंचे तो उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। जिसके विरोध में उन्हें धरने पर बैठना पड़ा। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर बावल व रेवाड़ी के विधायकों से भी मिलेंगे।
सूचना पाकर कसौला पुलिस व श्रम अधिकारी हवा सिंह मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंधकों की नीयत में खोट आ गया है और उन्हें यह कहकर बाहर निकाला जा रहा है कि वे ठेकेदार के कर्मी हैं। प्रबंधकों ने ठेकेदार का अनुबंध समाप्त कर दिया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि वह उनकी नौकरी को बचाने के लिए आगे आए। हवा सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास जारी हैं।