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कूपी की झंकार पर खेली गायें, धूमधाम से मना गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महोत्सव

पुष्टि सम्प्रदाय की तृतीय पीठ प्रभु श्री द्वारकाधीश मन्दिर में शुक्रवार को गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महापर्व धूमधाम से मनाया गया।

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Cows played on the chimes celebrating the Govardhan Puja and Annadoot

पुष्टि सम्प्रदाय की तृतीय पीठ प्रभु श्री द्वारकाधीश मन्दिर में शुक्रवार को गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महापर्व धूमधाम से मनाया गया।

राजसमंद. पुष्टि सम्प्रदाय की तृतीय पीठ प्रभु श्री द्वारकाधीश मन्दिर में शुक्रवार को गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महापर्व धूमधाम से मनाया गया।
प्रभु श्री द्वारकाधीश मन्दिर सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को शृंगार में प्रभु श्री द्वारकाधीश को श्रीमस्तक पर श्वेत जरी मजले साज के कूले तापे 11 चन्द्रिका को सादा जोड़ फरूखशाही जरी को चाकदार वागा, लाल अथलस की सूथन, लाल जरी का कटी का पटका, हीरा-पन्ना-माणक के आभरण व दो जोड़ी के शृंगार धराऐ गये। इसके बाद राजभोग के दर्शन उपरान्त प्रभु श्री द्वारकाधीश सुखपाल में बिराजीत हो बृजवासी ग्वाल-बालों के कंधों पर सवार होकर गोवर्धन पूजा चौक में पधारे जहां हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने प्रभु के जयघोष के साथ उनका अभिनन्दन किया। इस अवसर पर गोबर से बनाये गये गोवर्धन की पूजा गोस्वामी परिवार द्वारा की गई। इस मौके पर तृतीय पीठ के राजकुमार वेदान्त कुमार गोस्वामी, तृतीय गृहधीश पराग कुमार गोस्वामी व संजीव कुमार गोस्वामी के साथ मुखिया, भीतरिया व मन्दिर सेवाकर्मी उपस्थित थे।

शुक्रवार को बृजवासियों ने अपने कंधों पर गोवर्धन को सुखपाल में बिराजित कर गोवर्धन चौक तक लाए। इसके पश्चात गोवर्धन की पूजा-अर्चना की गई। इससे पूर्व सायंकाल गोवर्धन पूजा चौक में गोबर का पहाड़ सजाया गया। जहां नंदवंश की मुख्य गोमाता ने इस गोवर्धन पर्वत को घूंदा। इसके बाद अन्नकूट के दर्शन खुले एवं रात्रि को साढ़े ११ बजे अन्नकूट की लूट प्रारंभ हुई। इसमें मेवाड़ अंचल से आने वाले सैकड़ों आदिवासी भील सदस्यों अन्नकूट के प्रसाद को लूटा।

नगर भ्रमण को निकला गोस्वामी परिवार
शाम 5 बजे गोस्वामी परिवार द्वारकाधीश मन्दिर से नगर भ्रमण पर निकला। इस अवसर पर जगह-जगह लोगों द्वारा पुष्प वर्षा कर गोस्वामी परिवार के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए स्वागत किया गया। शाम 6 .30 बजे अन्नकूट के दर्शन खुले, जो करीब 9 बजे तक रहे। इस मौके पर क्षेत्रीय व गुजरात से आये सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अन्नकूट की अलौकिक झांकी के दर्शन किये व प्रभु के जयकारे लगाए। इसके बाद रात करीब 9 बजे सबसे पहले ब्रजवासी समुदाय (सनाढ्य, गुर्जर, गौरवा, जाट) द्वारा गुंजा लूटा गया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में आए भील समुदाय के समूहों द्वारा अन्नकूट लूटने की परंपरा का निर्वहन किया गया।