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Kali Chaudas: आज भूत चतुर्दशी, श्मशान में अनुष्ठान से काली शक्तियों और शत्रुओं से होती है रक्षा

दिवाली के एक दिन पहले की तिथि काली चौदस के रूप में मनाई जाती है, इसे भूत चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। जब आधी रात के दौरान चतुर्दशी प्रबल हो तब इसका समय माना जाता है, यानी महानिशिता समय के रूप में इसे जाना जाता है। इसलिए यह नरक चतुर्दशी से अलग होता है। आइये जानते हैं इसकी पूजा विधि और महत्व.

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Pravin Pandey

Nov 10, 2023

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काली चौदस कल 11 नवंबर 2023

कब है काली चौदस यानी भूत चतुर्दशी
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 11 नवंबर 2023 को दोपहर 01:57 बजे से
चतुर्दशी तिथि समापन: 12 नवंबर 2023 को दोपहर 02:44 बजे तक
काली चौदस: शनिवार 11 नवंबर 2023
काली चौदस मुहूर्त: रात 11:39 बजे से देर रात 12:30 बजे तक
हनुमान पूजा: शनिवार, 11 नवंबर 2023

क्या होता है खास
काली चौदस के दिन माता काली की उपासना की जाती है। इससे बुराइयों से रक्षा और दुश्मनों पर विजय मिलती है। यह त्योहार मुख्य रूप से गुजरात, पं. बंगाल आदि राज्यों में मनाया जाता है। काली चौदस के प्रमुख अनुष्ठानों में अंधेरे की देवी और वीर वेताल की पूजा शामिल होती है। इसलिए इसके लिए लोग आधी रात के दौरान श्मशान में जाते हैं और यहां विधि विधान से पूजा करते हैं।


मान्यता है कि इस दिन सभी जगह यम के लिए दीपक जलाया जाता है, कुछ जगहों पर श्मशान में भी अनुष्ठान किया जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन की परेशानियों, बुरे कर्मों और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है। काली चौदस पर मध्य रात में काली मां की पूजा करने से भक्त को शारीरिक और मानसिक दुखों से छुटकारा मिलता है। दुश्मनों पर विजय भी मिलती है। काली चौदस की रात तंत्र विद्या के साधक कई तरह के अनुष्ठान करते हैं। इस दिन पूजा अर्चना से लंबे समय से चली आ रही बीमारियां दूर होती हैं और काले जादू का बुरा प्रभाव दूर होता है। राहु-शनि दोषों से भी राहत मिलती है।

करियर कारोबार की बाधा होती है दूर
काली चौदस की आधी रात काली चालीसा पाठ करने से करियर-कारोबार की मुश्किलें दूर होती हैं। महाकाली की साधना तंत्र साधकों के लिए अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। जो भी भक्त इस दिन मां काली की उपासना करता है उसे मानसिक और शारीरिक तनावों से मुक्ति मिलती है।

काली चौदस पूजा विधि
1. काली चौदस की पूजा करने से पहले अभ्यंग स्नान करना आवश्यक होता है।
2. धार्मिक मान्यता है कि अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति नरक के कष्ट से छुटकारा मिल जाता है।
3. अभ्यंग स्नान के बाद शरीर पर परफ्यूम लगाएं और पूजा के लिए बैठ जाएं।
4. एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर मां काली की मूर्ति की स्थापना करें और फिर पूजा करें।
5. चौकी पर मां काली का मूर्ति स्थापना करने के बाद वहां दीप जलाएं।
6. दीप जलाने के बाद फल, फूल, कुमकुम, हल्दी, कपूर और नारियल, नैवेद्य देवी काली पर चढ़ाएं।
7. काली चालीसा का पाठ करें और काली मंत्रों का जाप करें।