
Adhik Maas 2017 - 2018 and Adhik Maas Importance in Hindi
होशंगाबाद। हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2018 में दो ज्येष्ठ माह होंगे। खास बात यह रहेगी कि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से साल के 365 दिन में ही यह तिथियां भी शामिल होंगी। ज्योतिषाचार्य पं. सोमेश परसाई ने बताया कि हिंदू पंचांग के हिसाब से तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है। तिथियों का क्षय होते होते तीसरे वर्ष एक माह बन जाता है। इस वजह से हर तीसरे वर्ष में अधिकमास होता है। वर्ष 2018 में 16 मई से 13 जून तक की अवधि अधिकमास की रहेगी। वैसे ज्येष्ठ माह इसके पूर्व 30 अप्रैल से प्रारंभ होकर 27 जून तक रहेगा परंतु कृष्ण और शुक्ल पक्ष के दिनों के मान से अधिकमास मई जून के मध्य भाग में रहेगा।
अधिकमास क्या है
जिस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह अधिक मास होता है, इसी प्रकार जिस माह में दो सूर्य संक्रांति होती हैं वह क्षय मास कहलाता है। इन दोनों ही मासों में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। हलांकि इस दौरान धर्म-कर्म के पुण्य फलदायी होते हैं। सौर वर्ष 365.2422 दिन का होता है जबकि चंद्र वर्ष 354.327 दिन का रहता है। दोनों के कैलेंडर वर्ष में 10.87 दिन का अंतर रहता है और तीन वर्ष में यह अंतर 1 माह का हो जाता है। इस असमानता को दूर करने के लिए अधिक मास एवं क्षय मास का नियम बनाया गया है।
अधिक मास क्यों व कब
यह एक खगोलशास्त्रीय तथ्य है कि सूर्य 30.44 दिन में एक राशि को पार कर लेता है और यही सूर्य का सौर महीना है। ऐसे बारह महीनों का समय जो 365.25 दिन का है, एक सौर वर्ष कहलाता है। चंद्रमा का महीना 29.53 दिनों का होता है जिससे चंद्र वर्ष में 354.36 दिन ही होते हैं। यह अंतर 32.5 माह के बाद यह एक चंद्र माह के बराबर हो जाता है। इस समय को समायोजित करने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अधिक मास होता है। एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या के बीच कम से कम एक बार सूर्य की संक्रांति होती है। यह प्राकृतिक नियम है। जब दो अमावस्या के बीच कोई संक्रांति नहीं होती तो वह माह बढ़ा हुआ या अधिक मास होता है। संक्रांति वाला माह शुद्ध माह, संक्रांति रहित माह अधिक माह और दो अमावस्या के बीच दो संक्रांति हो जायें तो क्षय माह होता है। क्षय मास कभी कभी होता है।
नहीं होंगे शुभ कार्यं
अधिकमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। लेकिन धार्मिक अनुष्ठान कथा आदि के लिए यह महिना उत्तम माना जाता है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि अधिमास को पुरषोत्तम मास भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को पुण्य लाभ कमाने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2018 के बाद 2020 में अधिकमास होगा। खास बात यह है कि दो ज्येष्ठ वाला अधिकमास का योग 10 साल बाद आ रहा है। इसके पूर्व वर्ष 2007 में ज्येष्ठ में अधिकमास का योग बना था।
Published on:
10 Dec 2017 01:47 pm
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