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अब सुपर-100 का चयन करेंगे आनंद कुमार

गणितज्ञ आनंद ने कहा देश में दो तरह की शिक्षा नीति चल रही, अंग्रेजी की अनिवार्यता की बाध्यता होना चाहिए खत्म

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Anand Kumar will now choose the Super-100

Anand Kumar will now choose the Super-100

बैतूल। आईआईटी-जेईई परीक्षाओं के लिए फेमस सुपर-30 कोचिंग अब सुपर-100 हो जाएगी। इसके लिए देशभर से छात्र चुने जाएंगे। इसी सिलसिले में इसके संस्थापक आनंद कुमार पिछले दिनों बैतूल में थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कोचिंग संस्थानों के व्यवसायीकरण पर चिंता जताते हुए सरकारी स्कूलों के गिरते शैक्षणिक स्तर पर सवाल खड़े किए।

देश भर के सुपर 100 छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग देने की तैयारी में जुटे आनंद ने बैतूल में अधिकारियों एवं मीडिया से चर्चा की। वे अगले महीने से बैतूल में शिक्षकों का दस दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम भी करेंगे। इसी को लेकर वह बैतूल पहुंचे थे। देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनका कहना था कि आज देश में दो तरह की शिक्षा नीति चल रही है एक तो बड़े शहरों में फाइव स्टार होटलों की तरह निजी स्कूल है तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं आते और स्कूलों के खिड़की दरवाजे तक चोरी हो रहे हैं। जब तक इस खाई को नहीं भरा जाता है देश का विकास संभव नहीं होगा।

गणितज्ञ आनंद ने कहा कि शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में बदलाव गरीब विरोधी साबित हो रहे हैं। आईआईटी में गरीब छात्र प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग का पैटर्न बदला। अंग्रेजी अनिवार्य कर दी गई। उन्होंने कहा कि युवाओं को हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए। सभी मिलजुलकर रहें। स्वेदशी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने सुपर-30 के तहत गरीब छात्रों को दी जा रही शैक्षणिक सेवाओं की जानकारी दी। अंग्रेजी आज की जरूरत है इसके लिए सरकार को पंचायत स्तर पर अच्छे ट्रेनिग सेंटर खोलने चाहिए और वहां अंग्रेजी की पढ़ाई होनी चाहिए। अंग्रेजी की अनिवार्यता की बाध्यता नहीं होनी चाहिए और ट्रेनिग सेन्टरों गरीब बच्चे भी अंग्रेजी सिख सके ।

'अच्छा शिक्षक ही समाज को बदल सकता हैÓ
स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर उन्होंने कहा कि यह समाज का भी कर्तव्य है कि अच्छे शिक्षक दें । अच्छा शिक्षक ही समाज को बदल सकता है। उन्होंने कहा कि अच्छे शिक्षक बनने के लिए राज्य सरकारों को चाहिए कि शिक्षकों को बेहतर ट्रेंनिग दें। सरकार को चाहिए कि स्कूलों में शिक्षकों को कमी को जल्द दूर करें। देश भर के स्कूलों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है। शिक्षा का स्तर अब गांव जिले और देश का ही नहीं रह है। यह अब वैश्विक स्तर का हो गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषा का अपना महत्व है।