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ये है दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिंरगा लहराने वाली महिला, ऑक्सीजन सिलेंडर रेग्युलेटर हुआ लीक, फिर भी हासिल की फतह

जान जोखिम में डालकर फतह हासिल का पल आज भी करता है रोमांचित

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Bhavna Dahria, the woman who conquered Mount Everest

ये है दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिंरगा लहराने वाली महिला, ऑक्सीजन सिलेंडर रेग्युलेटर हुआ लीक, फिर भी हासिल की फतह

होशंगाबाद. माइनस 40 डिग्री तापमान, लीकेज ऑक्सीजन सिलेंडर और पर्वतारोहियों के शवों जैसी कई मुश्किलों से जूझते हुए आखिरकार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी फतह कर ली। आज भी रोमांचित करने वाला है। यह बात कई मुश्किलों से निकलर दुनिया की सबसे ऊंची पर तिंरगा लहराने वाली भावना डेहरिया का। जिसने ऑक्सीजन सिलेंडर रेग्युलेटर लीक होने के बाद भी जीत हासिल की। वहीं शनिवार को यह अपनी माँ के साथ होशंगाबाद शहर पहुंची जहां उनका धूमधाम से मेहरा समाज ने स्वागत किया।

यहां की रहने वाली है भावना
भावना डेहरिया छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी बाहुल्य तामिया की रहने वाली 27 वर्षीय भावना ने 22 मई को समुद्र तल से 48 हजार 848 मीटर ऊचे माउंट एवरेस्ट को अन्य पर्वतारोही दल के साथ फतह किया। भावना का लक्ष्य है कि वह वल्र्ड की छह टॉप चोटियों को भी फतह करे। वहीं पिपरिया में भावना का नागरिकों ने पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया।

ऑक्सीजन सिलेंडर का रेग्यूलेटर हुआ था लीक
शिखर की चढ़ाई के वक्त ऑक्सीजन सिलेंडर का रेग्यूलेटर लीक करने लगा था। तब डेढ़ घंटे तक संघर्ष के बाद वह ठीक नहीं हुआ। लीकेज के कारण काफी गैस निकल चुकी थी, तो शेरपा ने मुझसे वापस नीचे जाने को कहा, तब चोटी की दूरी सिर्फ चार सौ मीटर रह गई थी। तब मैंने हार नहीं मानी और शेरपा से उसका रेगुलेटर बदल कर अपनी जान जोखिम पर डालकर अकेले ही आगे का सफर तय किया। किसी तरह कमप्रेशर से ऑक्सीजन लेकर चोटी पर पहुंचकर झंडा लगाया।

घर से बिना बताए पहुंची पहाड़ों पर
मैं कई बार अकेले पहाड़ों पर चढ़कर बैठ जाती थी। तामिया में जितने भी पहाड़ हैं बचपन में ही उनमें चढ़ चुकी हूं। पहाड़ों से नीचे का नजारा देखकर बहुत अच्छा लगता था। घर से बिना बताए ही पहाड़ पर चढ़ जाती थी। घर के लोग परेशान होते थे कि बेटी कहां गई।

पातालकोट एडवेंचर में चुनी गई
तामिया पातालकोट में आयोजित एडवेंचर के लिए स्कूल की ओर से मुझे चुना गया। इंस्टक्टर मैडम मैंने कहा, आप जैसा बनना है। उन्होंने बताया मैं एक पर्वतारोही हूं, इसके लिए कोर्स करना पड़ता है। इसके बाद कोर्स किया और पर्वतारोही बनी। इस दौरान हिमालय के दो-तीन पहाड़ चढऩे का अनुभव भी मिला।

माँ ने कहा अपनी बेटी के लिए
भावना की माँ उमा देवी का कहना है कि हर बेटी में एवरेस्ट छूने की काबिलियत होती है। वस उन्हें खुला छोड़ दो। भावना की माँ ने कहा मेरी बेटी मेरी शान हैं उम्मीद नहीं थी कि बेटी एक दिन देश की सबसे ऊंची चोटी पर अपने परिवार के सम्मान को स्थापित करेगी। लेकिन मेरी बेटियों ने जो ठाना वह कर दिखाया। बेटियों को उठने के लिए खुला आसमान दें।

चारों बच्चों को दी उच्च शिक्षा
भावना की बड़ी बहन प्रियदर्शनी गांधी मेडिकल कॉलेज में ट्रेनर है। दूसरी बहन नूतन पुणे में सॉफ टवेयर इंजीनियर है और भावना एवरेस्ट फतह करने वाली। साथ ही भाई टॅूरिज्म मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है। पांचवे नंबर की बहन गजल अभी स्टूडेंट है।

मुख्यमंत्री ने की आर्थिक मदद
एवरेस्ट पर जाने के लिए करीब 25 लाख रुपए से अधिक का खर्च आ रहा था। करीब पांच लाख रुपए से अधिक के ट्रैकिंग इक्यूपमेंट आ रहे थे। पिता शिक्षक हैं इसलिए इतना खर्च असंभव था। मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिली। सीएम की आर्थिक मदद से एवरेस्ट फतह कर सकी।

किया गया सम्मान
मेहरा समाज महासंघ ने भावना डेहरिया का सम्मान किया।