
अमित बिल्लौरे/सोहागपुर/ जिला उपभोक्ता फोरम होशंगाबाद ने पिपरिया निवासी एक परिवादी पर आधारहीन परिवाद लगाने तथा न्यायालय का समय बर्बाद करने पर जुमाने का आदेश दिया है। वर्ष 2015 के फसल बीमा के मामले में परिवादी ने बैंक व बीमा कंपनी पर सेवा में कमी के आधार पर परिवाद प्रस्तुत किया था। किसी उपभोक्त फोरम की तरफ से जारी किया गया यह संभवत: पहला फैसला है। अधिवक्ता वर्मा ने बताया कि मामले में विपिन बिहारी शुक्ला अध्यक्ष जिला उपभोक्ता फोरम होशंगाबाद तथा सफलता तिवारी सदस्य जिला उपभोक्ता फोरम होशंगाबाद ने छह मार्च को फैसला सुनाया है।
यह है मामला
18 मई 2017 को परिवादी प्रशांत कुमार पुत्र कमल सिंह निवासी पिपरिया द्वारा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पिपरिया के शाखा प्रबंधक व राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना भोपाल के क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दायर किया था। प्रशांत ने परिवाद के अधिकार नरेश उपभोक्ता संरक्षण समिति को दिए थे। उन्होंने 2015 के खरीफ सीजन की सोयाबीन फसल की बीमा क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान न करने के कारण सेवा में कमी बताते हुए परिवाद प्रस्तुत हुए बीमा राशि और उस पर ब्याज, मानसिक प्रताडऩा के लिए 20 हजार रुपए व परिवाद व्यय के लिए पांच हजार रुपए दिलाने की मांग की थी। परिवाद में बताया था कि परिवादी ग्राम उमरिया पटवारी हल्का नंबर 38 तहसील पिपरिया जिला होशंगाबाद स्थित भूमि रकबा 5.0706 हैक्टेयर का स्वामी है। जिसने सेेंट्रल बैंक आफ इंडिया शाखा पिपरिया में अपने खाते से दो लाख रुपए का ऋण 23 सितंबर 2015 को लिया तथा पांच नवंबर 2015 को प्रीमियम राशि तीन हजार 275 खाते से कटवाकर परिवादी ने फसल का बीमा कराया था तथा जानकारी दी थी कि उसने सोयाबीन बोया था। बैंक प्रतिनिधि ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था।
बैंक का जवाब
जबाव में बैंक ने बताया कि संबंधित राशि का प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को पहुंचाया था तथा परिवादी के सोयाबीन बोने की बात गलत थी। घोषणा पत्र में फसल चक्र व अन्य दस्तावेजों में हल्के की भूमि पर धान की फसल बोई गई थी। परिवादी ने शासकीय खसरे में तथा केसीसी बनवाने के लिए दिए आवेदन में दी गई जानकारी में धान की फसल होने का उल्लेख किया है। इसके बाद फसल परिवर्तन की सूचना नहीं दी। तथा गलत लाभ लेने के प्रयास में असत्य जानकारी दी है। बैंक की ओर से साक्षी चंद्रशेखर वर्मा, शाखा प्रबंधक पिपरिया ने 14 अगस्त 2017 में न्यायालय में शपथ पत्र प्रस्तुत कर कहा कि परिवादी का शपथ पत्र झूठा व मनगढ़ंत है। बीमा कंपनी ने परिवाद निरस्त करने की मांग के समर्थन में जानकारी दी कि बीमा कंपनी का कार्य बैंक द्वारा दी गई सूची के आधार पर करने का है तथा तत्कालीन समय में बैंक ने जो सूची फसल नुकसानी की दी थी, उसके आधार पर बीमा राशि दी जा चुकी है। बैंक की किसानों की सूची रखती है, बीमा कंपनी नहीं।
फोरम की प्रतिक्रिया व फैसला
फैसले में फोरम ने कहा कि परिवादी प्रशांत कुमार ने 2013-14 में अपने रकबे में सोयाबीन बोने का उल्लेख करते हुए तहसीलदार को आवेदन दिया था। लेकिन परिवाद 2015 का लगाया है। तहसीलदार को दिया गया आवेदन सबूत की दृष्टि से कोई मूल्य नहीं रखता है। इससे साबित होता है कि परिवादी ने सोयाबीन की फसल न बोकर धान की फसल बोई थी तथा धान अधिसूचित क्षेत्र पटवारी हल्का नंबर 38 मुख्यालय तरौनकलां तहसील पिपरिया में अधिसूचित घोषित नहीं थी। ना ही परिवादी ने धान की उपज में कमी को साबित किया है। इसके बाद फोरम ने निर्णय दिया है कि परिवादी ने झूठे तथ्यों के आधार पर आधारहीन परिवाद प्रस्तुत कर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए फोरम के न्यायिक समय को नष्ट किया है। इसलिए जरूरी है कि आधारहीन परिवादों की रोकथाम के लिए परिवादी पर परिव्यय लगाया जाए। ताकि समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए। परिवाद आधारहीन होने से एक हजार रुपए परिव्यय के साथ इसे निरस्त करने का आदेश दिया और परिवादी पर एक हजार रुपए जुर्माने का भुगतान समान रूप से विपक्षी को करें तथा स्वयं का व विपक्षी का परिवाद व्यय भी वहन करे।
Published on:
14 Mar 2020 11:21 am
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