
Guptanvrattri: आधी रात से तंत्र मंत्र के साथ करें इन दस विधाओं की अराधना, मिलेगा दस गुना फल
होशंगाबाद। हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पडऩे वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।
गुप्त नवरात्रि का महत्त्व (Importance of Gupt navratri)
देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
आशादा नवरात्रि जिसे गुप्त नवरात्री या वरही नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है नौ दिवसीय वराही देवी को समर्पित उत्सव है। गुप्त नवरात्री के दिन तांत्रिकों और साधकों के लिए बहुत ही शुभ माने जाते है।
उपवास रख कर और श्लोकों और मंत्रों का जप करके भक्त देवी के प्रति अपनी भक्ति को दर्शाते है। यह माना जाता है कि इस नवरात्री के दौरान देवी तुरंत भक्तों की प्रार्थनाओं पर ध्यान देती हैं और उनकी इच्छाओं को पूरा करती हैं। वराही देवी को तीन रूपों में पूजा की जाती है। दोषों को हटाने वाली धन और समृद्धि का उपहार देने वाली होती है माँ भगवती।
इनकी की जाती है पूजा
गुप्त रूप से की जाती है देवी की पूजा
आषाढ़ मास की नवरात्रि में गुप्त रूप से देवी मां की पूजा की जाती है। इन दिनों में तंत्र-मंत्र कर्म काफी अधिक होते हैं। तांत्रिकों के लिए इस नवरात्रि का महत्व काफी अधिक है। देवी मां के हवन, पूजन आदि कर्म गुप्त रूप होते हैं, इसीलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। गुप्त नवरात्रि में मानसिक पूजा करने का महत्व है। आमतौर पर पूजा देर रात में की जाती है।
देवी मां के नौ स्वरूप
नवरात्रि के पहले दिन शैल पुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्माण्डा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नौवें दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा की जाती है।
इन दस महाविद्याओं की होती है पूजा
नौ देवियों के साथ ही दस महाविद्याओं की भी विशेष पूजा की जाती है। ये हैं दस महाविद्या काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।
देवी पूजा में ध्यान रखें इन बातों
जो लोग देवी मां की पूजा करते हैं, उन्हें अधार्मिक कामों से बचना चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। भक्त को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति को फलाहार लेना चाहिए। गलत कामों से बचें और माता-पिता का अनादर न करें। महिलाओं का सम्मान करें, अन्यथा पूजा-पाठ निष्फल हो जाती है।
यह ब्रत, दिन भी
बुधवार, 3 जुलाई से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि शुरू होगी, ये 10 जुलाई तक चलेगी। इन दिनों में गुप्त रूप से देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।
शनिवार, 6 जुलाई को विनायकी चतुर्थी व्रत है। इस दिन भगवान श्री गणेश के लिए व्रत-उपवास करना चाहिए।
शुक्रवार, 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत करना चाहिए। सालभर की सभी एकादशियों में इसका महत्व सबसे ज्यादा है, क्योंकि इस तिथि से भगवान विष्णु विश्राम करेंगे और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करेंगे।
मंगलवार, 16 जुलाई को आषाढ़ मास की पूर्णिमा है। इसे गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसी तिथि पर रात में चंद्र ग्रहण होगा। ये ग्रहण भारत में दिखाई देगा। ग्रहण की शुरुआत रात में करीब 1.30 मिनट पर होगी और मोक्ष सुबह 4.30 पर होगा।
बुधवार, 17 जुलाई से सावन माह शुरू हो जाएगा। इस माह में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।
शनिवार, 20 जुलाई को गणेश चतुर्थी व्रत है। इस दिन भगवान गणपति की विधि-विधान से पूजा की जाती है, व्रत-उपवास करने की परंपरा है।
रविवार 28 जुलाई को कामिका एकादशी है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास करना चाहिए।
Published on:
03 Jul 2019 12:23 pm
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