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सेहत और स्वाद – ठंडक ही नहीं स्वास्थयवर्धक भी है मटके का पानी

फ्रिज के इस जमाने में भी ज्यादातर लोग पसंद करते हैं मटका का पानी, प्याऊ से लेकर घरों में रखे मिलते हैं मटके

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सेहत और स्वाद - ठंडक ही नहीं स्वास्थयवर्धक भी है मटके का पानी

होशंगाबाद. (गोविंद चौहान ). पीढिय़ों से, भारतीय घरों में गर्मी के दिनों में ठंडे पानी के लिए मिट्टी के बर्तन यानी घड़े, सुराही अथवा नांद आदि का इस्तेमाल किया जाता है। आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो आज भी मिट्टी से बने बर्तनों में पानी पीते है। ऐसे लोगों का मानना है कि मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू के कारण घड़े का पानी पीने का आनंद और इसका लाभ अलग ही होता है। भीषण गर्मी में घड़े का पानी ठंडक ही नहीं देता बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत फायदेमंद भी होता है। इसका कारण है कि मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लडऩे की क्षमता पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाए, तो उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं। इसलिए घड़े में रखा पानी हमें स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। आप भी इसके फायदे जानेंगे तो फ्रिज का पानी पीना छोड़कर घड़े का पानी पीना शुरु कर देंगे।

क्यों ठंडा होता है घड़े का पानी
पानी का ठंडा होना वाष्पीकरण की क्रिया पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा वाष्पीकरण होगा, उतना ही ज्यादा पानी भी ठंडा होगा। मिट्टी के बने मटके में सूक्ष्म छिद्र होते हैं। ये छिद्र इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें आसानी से नहीं देखा जा सकता। इन छिद्रों द्वारा मटके के पानी से वाष्पीकरण की प्रक्रिया होती है । इस प्रक्रिया में मटके का तापमान कम हो जाता है और पानी ठंडा बना रहता है।

ये होते हैं फायदे

* आमतौर पर जब हम धूप से घूमकर आते हैं तो हमें ठंडा पानी पीने की तलब लगती है और हम फ्रिज से बाटल निकाल कर पी लेते हैं ैं। ठंडा पानी हम पी तो लेते हैं लेकिन बहुत ज्यादा ठंडा होने के कारण यह गले और शरीर के अंगों को एक दम ठंडा तो कर देता है लेकिन इसका शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे गला पकडऩे की समस्या होने के साथ ही टांंसिल्स व अन्य व्याधियां हो जाती हैं। जबकि घडे को पानी बर्फ की तरह बहुत ठंडा नहीं होने के कारण शरीर को ठंडक तो देता ही है साथ ही गले को भी स्वस्थ रखता है।

* मिट्टी में शुद्धिकरण करने का गुण विशेष रूप से होता है. यह सभी प्रकार के विषैले पदार्थों को सोख लेती है और जो पोषक तत्व होते हैं वह पानी में घुल जाते हैं। घड़े में पानी का तापमान हमेशा एक जैसा बना रहता है न बहुत अधिक ठंडा होता है और न गर्म। इसलिए घड़े का पानी शरीर को कभी नुकसान नहीं पहुंचाता।

* घड़े के पानी में मिट्टी में क्षारीय गुण पाया जाता हैं। मिट्टी का क्षार पानी की अम्लता के साथ प्रभावित होकर, उचित मिट्टी को उचित पीएच संतुलन प्रदान करता है। जिससे मिट्टी के बर्तनों का पानी विशेष लाभकारी होता है। ऐसे पानी को पीने से शरीर में एसिडिटी, पेट के दर्द सहित अन्य व्याधियों से राहत मिलती हैं। वहीं मिट्टी की सौंधापन पानी के स्वाद को बढ़ा देता है।

* नियमित रूप से घड़े का पानी पीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वहीं प्लास्टिक की बोतलों में पानी स्टोर करने से, उसमें प्लास्टिक से अशुद्धियां इक_ी हो जाती है और वह पानी को अशुद्ध कर देता है। साथ ही यह भी पाया गया है कि घड़े में पानी स्टोर करने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है।

* गर्मियों में लोग फ्रिज का या बर्फ का पानी पीते हैं लेकिन इसकी तासीर गर्म होती है। यह वात को बढाता है। बर्फीला पानी पीने से कब्ज हो जाती है, तथा अक्सर गला खराब हो जाता है। वहीं मटके का पानी वात नहीं बढ़ाता, इसका पानी संतुष्टि देता है। मटके के पानी से कब्ज ,गला खऱाब होना आदि रोग नहीं होते।