
बॉयो डीजल के उपयोग वाला भारतीय रेलवे का पहला शेड ढर्रे पर लौटा, बॉयो की जगह सामान्य डीजल डालकर दौड़ा रहे ट्रेन
इटारसी. भारतीय रेलवे में बॉयो डीजल के उपयोग से ट्रेन चलाने वाले इटारसी के पहले डीजल शेड में पिछले एक साल से बॉयो डीजल नहीं है। जिसके चलते पूर्व की तरह सामान्य डीजल डालकर ही इंजनों को पटरी पर दौड़ाया जा रहा है। इससे रेलवे को राजस्व के नुकसान के साथ डीजल से पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। विभागीय जानकारी के मुताबिक वर्ष २०१६ में १ लाख ५३ हजार लीटर बॉयो डीजल का इस्तेमाल इंजनों में किया गया था। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग डेढ़ लाख लीटर डीजल रेलवे स्टेशन, जीसी-४ और डीजल शेड से इंजनों में डाला जाता है।
पर्यावरण दिवस पर हुई थी शुरूआत
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बॉयो डीजल का उपयोग शुरू किया गया था। ५ जून २०१५ से इटारसी न्यूयार्ड के डीजल शेड में बॉयो डीजल का सबसे पहले उपयोग शुरू किया गया था। प्रत्येक इंजन में शुरूआती दौर में ५ प्रतिशत बॉयो डीजल मिलाने की अनुमति रेलवे बोर्ड ने दी थी। जिसकी मात्रा साल दर साल बढ़ाने की योजना थी।
सभी इंजनों में होता था बॉयो डीजल का उपयोग
तुगलकाबाद के बाद सबसे ज्यादा लोको (इंजन) होल्डिंग वाला शेड इटारसी है। यहां से वर्तमान में १७७ इंजन गुड्स और सवारी ट्रेनों में लगाए जाते हैं। इन सभी इंजनों में बॉयो डीजल का उपयोग किया जाता था।
दो रूपए सस्ता मिलता था बॉयो डीजल
वर्ष २०१६ में डीजल शेड को लगभग ६५ रुपए प्रति लीटर की दर से बॉयो डीजल की सप्लाई की गई थी। जबकि उस समय डीजल की कीमत ६७ रुपए थी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जीएसटी की वजह से बॉयो डीजल की कीमत डीजल से ज्यादा है। संभवत: यह भी एक वजह है जिससे बॉयो डीजल नहीं मिल रहा है।
इनका कहना है...
बॉयो डीजल का मामला हेड क्वार्टर का है। कीमत निर्धारण संबंधी समस्या बताई गई है। बॉयो डीजल किफायती व पर्यावरण के हिसाब से बेहतर है।
-अनुराग दत्त त्रिपाठी, सीनियर डीएमई डीजल शेड इटारसी
Published on:
27 Aug 2018 01:52 pm
बड़ी खबरें
View Allहोशंगाबाद
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
