
जानें भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की रोचक बातें
होशंगबाद। भगवान जगन्नाथ 14 जुलाई को बहन सुभद्रा और भाई बलदाऊ के साथ रथ में सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे। आज हम आपको रथ यात्रा की कुछ रोचक जानकारी से अवगत कराएंगे। जो शायद आज तक किसी ने नहीं सुनी होगी।
नीम की लकड़ी की बनीं है मूर्तियां
भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलदाऊ की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनीं हैं। जो अपने आप में अदभुत हैं। ऐसी ही मूर्तियां होशंगाबाद के जगन्नाथ मंदिर में स्थापित हैं। जो प्राचीन कालीन हैं।
हर 12 साल में बदलीं जाती हैं मूर्तियां
परंपरा के अनुसार जगन्नाथ पुरी में इन मूर्तियों को हर 12 साल बाद बदल दिया जाता है। लेकिन होशंगाबाद स्थिति मंदिर में ऐसा नहीं होता है। यहां की मूर्तियां अब तक नहीं बदली गईं।
तीनों मूर्ति में हाथ और पैर के पंजे नहीं होते
भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलदाऊ की मूर्तियां जो बनाई जाती हैं। उनकी हाथ और पैर के पंजे नहीं होते हैं। इन मूर्ति में कमर से नीचे का हिस्सा नहीं होता है।
मुगलकालीन है जगदीश मंदिर
मंदिर में 11 वीं पीढ़ी के महंत नारायणदास महाराज बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण मुगलकाल के दौरान कराया गया था। इसकी नकक्शी भी उसी दौर की है। मंदिर के आदि संस्थापक और पहले महंत रिधि रामदास महाराज थे।
14 जुलाई को निकलेगी रथ यात्रा
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को स्वस्थ होकर भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा बलदाऊ सहित रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे। रथयात्रा के दौरान शहर के मध्य स्थित महावीर टाकीज प्रांगण में यात्रा पूरे 1 दिन विश्राम करती है। महंत ने बताया कि यह परंपरा प्राचीन है पहले जनकपुरी में यात्रा सात दिनों तक रूकती थी।
महास्नान से रथयात्रा तक का सफर
28 जून को जेष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा, भाई बलदाऊ का महास्नान पंचामृत से किया जाता है। शीत लगने के कारण बीमार हो जाते हैं इसके बाद मूल सिंहासन से हटकर भगवान शयन कक्ष में चले जाएंगे। जहां वैद्य आयुर्वेदिक औषधियों से उनका उपचार करते हैं। इस दौरान भगवान को हल्का भोजन दिया जाता है।
Published on:
26 Jun 2018 12:05 pm
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