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नलकूप खनन के लिए आई 200 अर्जियां, लाभ मिला सिर्फ 25 को

परमिशन के लिए एसडीएम कार्यालय का चक्कर लगा रहे लोग, चार महीने में सिर्फ २५ आवेदकों को मिली खनन की इजाजत।

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madhya pradesh nalkoop khanan yojana

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इटारसी। नलकूप खनन पर पाबंदी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अक्टूबर २०१७ से लगाए गए नलकूप खनन पर प्रतिबंध का असर तापमान बढ़ते ही दिखने लगा है। पिछले चार महीने में नलकूप खनन के लिए २०० अर्जियां आ चुकी है। एसडीएम कार्यालय में जमा कराए गए आवेदनों की जांच नपा और राजस्व अमले से करवाई जा रही है। एसडीएम कार्यालय में आए नलकूप खनन के आवेदनों के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिबंध के बाद से अब तक सिर्फ २५ लोगों को खनन की इजाजत दी गई है। वह भी नपा और राजस्व अमले से स्थल परीक्षण कराने के बाद। नलकूप खनन का आवेदन जमा कराने वाले लोगों ने बताया कि दो महीने पहले आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वहीं मौसम की बेरुखी और लगातार गिरते जलस्तर से अब हमें जागने की जरूरत है। वॉटर हार्वेस्टिंग घरों और व्यवसायिक कॉम्पलेक्सों में सबसे जरूरी हो गया है। जिससे बारिश के पानी को सहेजा जा सके। इससे जलस्तर बेहतर होगा और गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इसके अलावा शहर के सभी ३४ वार्डों और बाजार क्षेत्र में मौजूद कुओं के रखरखाव की सबसे ज्यादा जरूरत है। शिक्षक राजकुमार दुबे, प्रोफेसर कश्मीर सिंह उप्पल ने कहा कि कुएं पानी के बेहतर स्त्रोत होते हैं। इनसे जलस्तर को बेहतर बनाए रखने और पानी स्टोर करने में मदद मिलती है।

जानिए किसे मिलेगी इजाजत और किसे नहीं
द्य जो व्यक्ति खनन के लिए परमिशन मांग रहा है। उसके पास यदि पीने के पानी का कोई साधन उपलब्ध नहीं है। तो नपा और राजस्व अमले से स्थल परीक्षण कराने के बाद खनन की परमिशन दी जाएगी।
द्य जिसके घर के पास या घर पर नपा की पाइपलाइन मौजूद है या फिर उसके पास पहले से पेयजल का कोई अन्य इंतजाम है। यदि आवेदक निर्माण के लिए ट्यूबवेल खनन करवाना चाहता है, तो उसे परमिशन नहीं दी जाएगी।
कलेक्टर ने दिए थे आदेश
होशंगाबाद जिले को जल अभाव ग्रस्त घोषित करने के बाद कलेक्टर अविनाश लवानिया ने अक्टूबर २०१७ में जिले में निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया था। यह आदेश मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत जारी किया गया। आदेश जिले के सभी शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 15 जुलाई 2018 तक लागू रहेगा।
सजा का प्रावधान
प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर मप्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 के अनुसार 2 वर्ष तक के कारावास, 2 हजार रुपए जुर्माना अथवा दोनों सजाओं से दंडित किया जा सकता है।
&खनन के लिए २०० आवेदन आए हैं, जिनकी जांच करवाई जा रही है। किसी भी निर्माण के लिए खनन की परमिशन नहीं मिलेगी। यदि किसी के पास पीने के पानी का कोई साधन नहीं है तो उसे इजाजत देंगे।
-आरएस बघेल, एसडीएम इटारसी