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mp assembly elections 2018 आशीर्वाद से पीएम और सीएम तक बने, मां नर्मदा ने दिलाई सत्ता

मर्यादा लांघी तो छीन लिया ताज, पांडवों को भी नर्मदा के प्रताप से मिला था राजसुख, मोरारजी देशाई ने नर्मदा का अभिषेक कर किया था सत्ता परिर्वतन

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madhya pradesh vidhan sabha chunav samachar and narmada news

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होशंगाबाद। महाभारत काल से लेकर अब तक मां नर्मदा के प्रताप के ऐसे कई रोचक किस्से हैं। जिसने उसकी दिल से आराधना की वह रंक से राजा बन गया। सत्ता का सुख भोगते समय उसकी मर्यादा का उल्लंघन किया तो वही सत्ता छिन भी गई। प्रदेश में फिर चुनाव हैं। भाजपा नर्मदा के प्रताप से ही चौथी वार भी सत्ता पर काबिज बनी रहना चाहती है। दूसरी तरफ कांग्रेस भी उसी के प्रताप से वापसी करना चाहती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा निकाली तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह छह महीने की नर्मदा सेवा परिक्रमा पर निकले हुए हैं। नर्मदा की कृपा से सत्ता पाने और गंवाने वाले ऐसे ही रोचक किस्सों से आपकों रूबरू कराती पत्रिका की यह रिपोर्ट......।

सत्ता पाने के कुछ उदाहरण
सबसे पहले पांडवों ने किया पूजन
कहते हैं जुए में अपना राजपाट गवाने के बाद जब पांडव अज्ञातवास बिता रहा थे तो वह बांद्राभान घाट आए थे यहीं पर उन्होंने सत्ता प्राप्ति के लिए पूजा अर्चना की। इसके बाद उन्होंने कौरवों को युद्ब में हराकर अपना राज सिंहासन पर कब्जा किया।

अलसुबह पहुंचे थे मोरारजी देसाई
आजादी के बाद हमेशा से ही कांग्रेस सत्ता में काबिज रही। १९७७ में जब जनता पार्टी सत्ता में आई तो कहा जाता है कि चुनाव के ठीक पहले मोरारजी देशाई अलसुबह होशंगाबाद मां नर्मदा का आर्शीवाद लेने के लिए पहुंचे थे उन्होंने यहां आकर मां नर्मदा का अभिषेक किया। उसके बाद सत्ता परिर्वतन हुआ और जनता पार्टी की सरकार बनीं। देशाई देश के चौथे प्रधानमंत्री बने। हलांकि यह बात अलग थी यह सरकार दो साल ही चली।

उमाभारती ने दिग्विजय सिंह से छीनी सत्ता
वहीं प्रदेश की राजनीति की बात कहें तो उमा भारती ने यहां आकर तपस्या की और मां नर्मदा का पूजन किया। इसके बाद दिग्गविजय सिंह से सत्ता लेकर वह सीएम बन गईं। हलांकि वह भी ज्यादा समय तक सीएम नहीं रह सकीं। इसके बाद सीएम बनने के पहले शिवराज सिंह चौहान ने भी मां नर्मदा का आर्शीवाद लिया।

मर्यादा तोड़ी तो चली जाती है सत्ता
मां नर्मदा यदि सत्ता पर काबिज करतीं हैं तो मर्यादा तोडऩे वाले को सत्ता विहीन भी कर देती हैं। अमरकंटक में प्रचलित है कि यहां से विमान द्वारा सीधे उड़ान नहीं भरी जाती। इससे मां नर्मदा की मर्यादा का उल्लंघन होता है। माना जाता है कि जिसने भी मां नर्मदा की मर्यादा को लांघा है, उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है।

इन्होंने गंवाई कुर्सी
- इंदिरा गांधी 1982 में हैलीकाप्टर से अमरकंटक आई थीं। फिर सत्ता में नहीं लौटीऔर उनकी 1984 में मौत हो गई।

- पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमरकंटक हेलीकाप्टर से आए लेकिन उसके बाद उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी।

- एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा बाबरी मस्जिद कांड से पहले हेलीकाप्टर से अमरकंटक आए थे, इसके बाद उनकी कुर्सी भी चली गई।

- एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री रहते हुए हेलीकाप्टर से अमरकंटक आए थे लेकिन उसके कुछ समय बाद वे कांग्रेस से अलग हो गए और अपनी अलग पार्टी बनायी।

- मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती सीएम रहते हुए 2004 में हेलीकाप्टर से आई थीं। उसके बाद इनकी कुर्सी भी चली गई। आखिरी बार उनका ही हेलीकॉप्टर यहां उतरा था।

बंद किए तीनों हेलीपेड
बताया जाता है कि आखिरी बार अमरकंटक में उमा भारती का ही हेलीकॉप्टर उतार था, लगातार हो रहे मिथकों के बाद यहां के तीनों हेलीपेड का इस्तेमाल ही बंद हो गया।