
maize production in madhya pradesh
होशंगाबाद. इस बार जिले में किसानों ने सोयाबीन की जगह शंकर मक्का फसल को अपनाया। करीब 20 हजार हैक्टेयर में लगभग 7 लाख क्विंटल मक्का की पैदावार हुई है। सोयाबीन से मोह भंग होने के बाद किसानों के लिए खरीफ के लिए मक्का फसल बेहतर विकल्प बनी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 2 लाख 52 हजार क्विंटल अधिक मक्का का उत्पादन हुआ। भावांतर योजना में भी मक्का को अच्छा रेट मिल रहे हैं।
रकबा और उत्पादन में वृद्धि : कृषि विभाग के मुताबिक वर्ष 2017-18 के खरीफ सीजन में मक्का की बुवाई रकबा बढ़कर 20 हैक्टेयर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष 2016-17 में यह रकबा 16 हजार हैक्टेयर था। इस बार मक्का की उत्पादकता 35-40 क्विंटल प्रति हैक्टेयर निकली। इस हिसाब से मक्का की कुल पैदावार 7 लाख क्विंटल के आसपास हुई, जबकि पिछले वर्ष पैदावार 4 लाख 48 हजार क्विंटल थी। उत्पादकता का एवरेज 38 क्विंटल प्रति हैक्टयर था। इस बार रकबे में 4 हजार हैक्टेयर व उत्पादन में 2 लाख 52 हजार क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
किसानों के लिए मक्का बना खरीफ का बेहतर विकल्प
केसला-बनखेड़ी ब्लॉक बना पहचान : मक्का का उपयोग ज्यादातर आदिवासी क्षेत्रों में होता है। छिंदवाड़ा जिले के बाद होशंगाबाद जिले का केसला और बनखेड़ी ब्लॉक मक्का की पहचान बना है। सामान्य मक्का के साथ ही शंकर मक्का का किसान 70 फीसदी तक उत्पादन ले रहे हैं। मक्का की खासियत ये है कि इसे ज्यादा पानी की जरुरत नहीं होती है। यह हल्की जमीन पर भी भरपूर पैदा होता है। वहीं मंडी में मक्का का रेट 1000-1100 रुपए क्विंटल मिल रहा है।
&खरीफ में लगातार सोयाबीन से नुकसान झेल रहे किसानों के लिए मक्का बेहतर विकल्प बन गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मक्का की अच्छी पैदावार हुई है। भावांतर में इसका रेट भी अच्छा मिलने से किसानों में खुशी का माहौल है। आने वाले वर्षों में मक्का के रिकार्डतोड़ उत्पादन की उम्मीदें हैं।
जितेंद्र सिंह, उप संचालक कृषि विभाग, होशंगाबाद
Published on:
05 Jan 2018 01:33 pm
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