
mansik tanav kaise dur kare in hindi
होशंगाबाद। आज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में तनाव हर किसी के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। स्थिति यह है कि बचपन से लेकर मृत्यु तक यह कभी पीछा नहीं छोड़ता। हर कोई इसका समाधान खोजता रहता है कि किस तरह तनाव से मुक्ति पाई जा सके, लेकिन गिने-चुने लोग ही इसमें सफल हो पाते हैं। मंगलवार को होशंगाबाद में मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष और व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी ने नर्मदा महाविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय पीरियोडिकल लेक्चर को संबोधित किया। इसमें तनाव रहते रहने के तरीके बताए।
तनाव के मुख्य कारण
कोई शोरगुल से तनावग्रस्त है, तो कोई ट्रैफिक में फंस जाने से तनाव में रहता है। कोई बेरोजगारी से तो कोई बच्चों के बिगडऩे से चिंतित है। इन्ही सब कारणों से हर कोई तनावग्रस्त है।
वहीं अन्य बीमारियों की तरह से मानसिक तनाव या स्ट्रैस भी तन और मन दोनों पर बुरा असर डालता है। जिससे अनेक शारीरिक और मानसिक बीमारियां जन्म ले लेती है। जैसे -डायबिटीज, पेप्टिक अल्सर, सिर दर्द, माइग्रेन, डिप्रेशन, हिस्टीरिया एवं मस्तिष्क रक्तस्राव प्रमुख हैं।
तनाव से इस तरह बचें
- भविष्य की चिंता में डूबे न रहें।
- किसी भी कार्य को टालने की प्रवृत्ति न बनाएं।
- कार्य इस सीमा तक न करें, जिससे अधिक थकान हो। यह भी पढ़ें - तनाव से मुक्ति पाने के उपाय।
- अपने मित्रों, रिश्तेदारों से बड़ी-बड़ी आशाएं न लगाएं।
- रोने के मौकों पर अपने आंसू न रोकें।
- क्रोध न करें और न ही उसे दबा कर रखें।
- जिन्हें जरा-जरा सी बात में क्रोध आ जाता है, उनका मस्तिष्क अकसर तनाव की स्थिति में रहता है। ऐसे व्यक्तियों को अपने क्रोध पर काबू पाने का उपाय करते रहना चाहिए।
तनावमुक्त वही रहता है, जो मैं कौन हूँ प्रश्न का जवाब खोज लेता है। रोचक बात यह है कि संसार में मनुष्य जीवन भर इस शून्य के लिए तनाव महसूस करता है। यह बात मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष और व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी ने नर्मदा महाविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय पीरियोडिकल लेक्चर में कही। व्याख्यान माला का एक विषय परीक्षा पूर्व तनाव एवं उसका प्रबंधन था। जो दर्शन शास्त्र के विभाग में आई.सी.पी.आर., नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित किया गया। वही डॉ. गोस्वामी ने बताया कि मनुष्य जहां कोई समस्या नहीं होती, वहां समस्या उत्पन्न करता है। जो पानी से लड़ता है वह तैर जाता है। मुर्दा कभी पानी में नहीं डूबता। शासकीय माधव कला एवं वाणिज्य, उज्जैन में दर्शन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. शोभारानी मिश्र ने धर्म की आवश्यकता और महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि तनाव अज्ञान के कारण होता है और आत्मतत्व से परिचित होने पर तनाव मिट जाता है। कार्यक्रम में जनभागीदारी अध्यक्ष दिनेश तिवारी, प्राचार्य डॉ. ओ.एन.चौबे, दर्शन शास्त्र विभागाध्यक्ष विनीता अवस्थी, हिंदी साहित्य डॉ. के.जी मिश्र सहित कॉलेज प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन विनय गोखले ने किया।
Published on:
13 Mar 2018 08:41 pm
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