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सौंदर्य-श्रद्धा का संगम है मुक्तागिरी, जानें क्या है खासियत

सैलानियों को मंत्रमुग्ध करती है सुंदरता

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सौंदर्य-श्रद्धा का संगम है मुक्तागिरी, जानें क्या है खासियत

भैंसदेही। बैतूल जिले की भैसदेही तहसील के सबसे रमणीय स्थलों में से मुक्तागिरी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध तो है, लेकिन जैन धर्मावलंबियों के श्रद्धालुओं के लिए अनूठा केंद्र भी है अपने आपको हरी-भरी विशाल पहाडिय़ों में समेटे क्षेत्र मप्र एवं महाराष्ट्र को भी जोड़ता है। यहां पहुंचने वालों को स्वर्ग जैसा अहसास होता है।
मंत्रमुग्ध कर देती है सुंदरता
इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर देती है। जैन धर्म के 52 मंदिरों वाले मुक्तागिरी क्षेत्र में देश के विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालु आते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित कर खूबसूरत वादियों को जीभर कर निहारते हैं इस तीर्थ क्षेत्र में मधुर कल कल करते कई झरने बहते हैं वन क्षेत्र में विचरण करते वन्य प्राणियों को देख पाना भी यहां सुलभ है। जैन धर्म से जुड़ी विभिन्न किवंदतीयों ने इस क्षेत्र का महत्व और भी बढ़ा दिया है।

होती है केसर की वर्षा
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यहां स्थित जैनियों के परम भगवान पाश्र्वनाथ जी के मंदिर में प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि में केसर की वर्षा होती है दूसरी और यहां के प्रतीक मंदिर में मौजूद मधुमक्खियों से यहां आने वाले व्यक्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। कई वन्य प्राणी भी मंदिर के इर्द-गिर्द विचरण करते हैं। पर्यटक के लिए इन वन्य प्राणियों को नजदीक से देखना अपने आप में रोमांचक है। पर्यटन स्थल के रूप में क्षेत्र पूरी तरह अनुकूल है लेकिन मप्र शासन द्वारा क्षेत्र की हमेशा से ही उपेक्षा की गई क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि जिले में मौजूद कई लोगों को जिले के इस महत्वपूर्ण विशेषताओं के बारे में आज भी जानकारी नहीं है इस क्षेत्र को संवारने की जहमत शासन ने कभी नहीं उठाई बावजूद तमाम सुविधाएं यहां के जैन संस्थान ने अपने बूते पर हासिल की है।

पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन सुविधा के नाम पर यहां कुछ नहीं है। तहसील के इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र की शासन द्वारा उपेक्षा करना समस्या से परे हैं। मप्र शासन के अनेक उच्च अधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों ने यहां आकर क्षेत्र की सुंदरता को निहारा है जबकि यह स्थल केवल मप्र के ही नहीं बल्कि देश के मानचित्र में स्थान पाने का पूरा हकदार है।