
नागपंचमी त्योहार में गुड़िया पीटने का अनूठा रिवाज, जानें पूरी बात
होशंगाबाद। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। पंडि़त शुभम दुबे के अनुसार इस बार नागपंचमी 5 अगस्त सोमवार को है। इस दिन नागों की पूजा करने का विधान है। 5 अगस्त को सोमवार व्रत का भी दिन है। ऐसे में 20 साल बाद यह अनोखा संयोग बनने जा रहा है जब सोमवार व्रत और नागपंचमी एक ही दिन पड़ेंगे। इससे पहले सावन मास में सोमवार को नाग पंचमी का विशेष योग 16 अगस्त 1999 में बना था। इसके बाद ऐसा योग 21 अगस्त 2023 को भी बनेगा। शास्त्रों की मानें तो ऐसे योग बहुत कम आते हैं।
नागों का दर्शन करने से बड़े से बड़ा संकट से मिलेगी मुक्ति पंडि़त दुबे बताते हैं कि
सनातन धर्म में नाग पंचमी का बड़ा महत्व है।
1. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सर्पों को पौराणिक काल से ही देवता के रूप में पूजा जाता रहा है। इसलिए नागपंचमी के दिन नाग पूजन का अत्यधिक महत्व है।
2. ऐसी भी मान्यता है कि नागपंचमी पर नागों की पूजा करने वाले व्यक्ति को सांप के डंसने का भय नहीं होता।
3. ऐसा माना जाता है कि इस दिन सर्पों को दूध से स्नान और पूजन कर दूध से पिलाने से अक्षय-पुण्य की प्राप्ति होती है।
4. यह पर्व सपेरों के लिए भी विशेष महत्व का होता है। इस दिन उन्हें सर्पों के निमित्त दूध और पैसे दिए जाते हैं।
5. इस दिन घर के प्रवेश द्वार पर नाग चित्र बनाने की भी परम्परा है। मान्यता है कि इससे वह घर नाग-कृपा से सुरक्षित रहता है।
महाभारत, रामायण आदि ग्रंथों और पुराणों में नागों की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है। पंडि़त शुभम दुबे के अनुसार ज्योतिष शास्त्र जन्मकुन्डली मैं भी कालसर्प दोष के निवारण हेतु यह श्रेष्ठ दिन होता है। नाग पंचमी पर नागदेव के दर्शन अवश्य करना चाहिए। और उनका पूजन करना चाहिए। नागदेव को सुगंध प्रिय है, अत: नागदेव की सुगंधित पुष्प व चंदन से पूजा की जाती है।
ज्योतिष् के अनुसार काल सर्प दोष के 12 मुख्य प्रकार बताए गये हैं, जो इस प्रकार हैं 1 अनंत 2 कुलिक 3 वासुकि 4 शंखपाल 5 पद्म 6 महापद्म 7 तक्षक 8 कर्कोटक 9शंखनाद 10 घातक 11विषाक्त और 12 शेषनाग। इन 12 नामों के नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने के धार्मिक और सामाजिक कारणों के साथ ज्योतिषीय कारण भी हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में योगों के साथ-साथ दोषों को भी देखा जाता है। कुंडली के दोषों में कालसर्प दोष एक बहुत ही महत्वपूर्ण दोष होता है। काल सर्प दोष कई प्रकार के होते हैं। इस दोष से मुक्ति के लिए व्यक्ति को नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने के साथ-साथ दान का महत्व बताते हैं। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अथार्त शिवलिंग स्वरूप की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और साधक को धनलक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से और रूद्राभिषेक करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उसे नागपंचमी के दिन भगवान शिव और नागदेवता की पूजा करनी चाहिए।
जानें नाग पंचमी पर्व का पूजन मुहूर्त
पूजा मुहूर्त - 05:49 से 8:28 (5 अगस्त 2019)
पंचमी तिथि प्रारंभ - 18:48 (4 अगस्त 2019)
पंचमी तिथि समाप्ति - 15:54 (5 अगस्त
पंडित शुभम दुबे के अनुसार उनका बड़े से बड़ा संकट और कालसर्प दोष का निवारण हो जाता है और कुंडली में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प दोष नाग पंचमी के दिन पूजन अर्चन वंदन करने से समाप्त हो जाता है शास्त्रों के अनुसार बताया जाता है कि अगर नाग पंचमी के दिन इन 12 प्रमुख नागों का स्मरण करते हैं तो कालसर्प दोष समाप्त हो जाता है।
Published on:
03 Aug 2019 05:36 pm
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