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राजा को मोक्ष मिलने के बाद से लग रहा संगम स्थल पर बांद्राभान मेला

संगम स्थल पर बांस और जाल लगाकर बनाया स्नान स्थल, रात में ही प्रदेशभर से पहुंच गए थे एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु  

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राजा को मोक्ष मिलने के बाद से लग रहा संगम स्थल पर बांद्राभान मेला

राजा को मोक्ष मिलने के बाद से लग रहा संगम स्थल पर बांद्राभान मेला

होशंगाबाद/ वानर रूप से एक राजा को मोक्ष मिलने के बाद से नर्मदा तवा संगम स्थल पर बांद्राभान मेला लग रहा है। हर साल यहां कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का विशेष महत्व है। इस बार मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा पर पांच लाख लोगों के मेले में आने की संभावना है।

यहां श्रृद्धालुओं के स्नान की जगह तय
तवा और नर्मदा के संगम स्थल पर श्रद्धालुओं के स्नान की जगह तय कर बांस के बेरीकेट्स और जाल लगाया है। जिससे श्रद्धालु स्नान कर पूजा-अर्चना कर सकेंगे। जहां स्नान का इंतजाम किया गया है, वहां करीब ढाई फीट पानी बताया जा रहा है। यहां होमगार्ड के तैराक सैनिक भी नियुक्त किए गए हैं। मेला 13 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा।

मेले में सुरक्षा के है पुख्ता इंतजाम
एसपी एमएल छारी ने बताया मेला स्थल व अन्य चिन्हित स्थलों पर पुलिस बल तैनात है। मेला स्थल सहित नर्मदा नदी के सभी घाटों पर गोताखोर/तैराक व होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई है। मेला स्थल सहित नर्मदा नदी के सभी घाटों पर श्रृद्धालुओं के सहयोग के लिए नपा कर्मचारी मौजूद हैं।


बांद्राभान मेले का महत्व
बांद्राभान में लगने वाले मेले का विशेष महत्व है। यहां नर्मदा और तवा का संगम होता है। मान्यता है पूर्व में एक राजा को वानर की आकृति से यहां मोक्ष मिला था। तभी से मेला लगता है। पूर्णिमा के दिन संगम स्थल पर डुबकी लगाने से लोगों की मनोकामना पूरी होती हैं। किवदंती है कि संगम पर कई तपस्वियों ने मोक्ष के लिए तपस्या की थी। इसी कारण पूरे प्रदेश से लोग यहां आते हैं।

संगम स्थल पर कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने व स्नान करने की उम्मीद है। जिसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई है।

कन्हैयालाल दायमा, मेला अधीक्षक जनपद पंचायत होशंगाबाद