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कुछ ऐसा है 138 साल पुरानी रामलीला का इतिहास

8 घंटे की डयूटी, स्कूल की पढ़ाई खत्म कर रामलीला के किरदार को निभा रहे बच्चे- बड़े  

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कुछ ऐसा है 138 साल पुरानी रामलीला का इतिहास

होशंगाबाद। नर्मदापुरम संभाग में पिछले 138 सालों से रामलीला मंचन की परंपरा निभाई जा रही है। नवरात्रि के नौ दिनों तक सेठानीघाट व रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन स्थानीय लोगो द्वारा किया जा रहा है। संस्कारों और परंपराओं से भरपूर रामलीला में कलाकार अलग अलग किरदार निभा रहें है।
सबसे खास बात की ये कलाकार पेशे से कलाकार नही बल्कि नगरपालिका में टाइम कीपर, शासकीय शिक्षक, व्यापासायी हैं, जो अपनी आठ घंटे की नौकरी पूरी करने के बाद रामायण का रामलीला के माध्यम से मंचन कर रहे हैं। इसके साथ साथ रामलीला में नन्हे, मुन्ने बच्चें भी शामिल है, जो अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन एवं सेना में शामिल हैं। ऐसे ही कुछ किरदारों ने अपने किस्सें साझा किए। वहीं इसके अलावा रामलीला में पंडित अजय परसाई शासकीय शिक्षक है, जो पिछले 50 सालों से विश्वामित्र, वशिष्ठ, अगस्त, ब्रम्हा, शत्रुघन, पार्वती, सखी जैसे किरदान निभा चुके है।

राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन- पेशे से विद्यार्थी
रामलीला में सबसे एहम किरदार निभा रहे नन्हे-मुन्ने बच्चें जो कि अभी अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं। इग्लिश मीडियम में पढऩे वाले राम प्रद्दयूम दुबे, लक्ष्मण शुभ परसाई, भरत लव दुबे, शत्रुघन यथार्थ तिवारी बने हैं। ये विद्याथी दो सालों से रामलीला का मंचन कर रहें है। रामलीला करने से पहले स्कूल खत्म कर तीन घंटे रिहर्सल करते हैं।
हनुमान
दीपेश ब्यास रामलीला में हनुमान का किरदार 13 सालों से निभा रहे है, ये पेशे से पशुपालन व्यवसायी है। पशुओं की सेवा करने के बाद ये रामलीला का मंचन करते है। दीपेश को अपने पिता सुरेश ब्यास और बड़े भाई से रामलीला में कार्य करने की प्रेरणा मिली।

सीता
सीता का मंचन सक्षम परसाई कर रहें है। ये अभी अपनी आठवी में हैं। सक्षम लड़का होकर लड़की का किरदार निभा रहें है। इनकों स्क्रिप्ट तैयार करने में काई समस्या नहीं आती। रामलीला का मंचन करना अच्छा लगता है, सारे चौपाई उन्हें याद हो जाती है, संवाद में कोई दिक्कत नहीं होती।
रावण/दशरथ
स्थानीय निवासी सुभाष चंद्र परसाई जो पिछले १३ सालों से रामलीला में रावण और दशरथ का किरदार निभा रहें है। ये पेशे से नगरपालिका में टाईम कीपर पद पर कार्यरत है, अपनी आठ घंटे की नौकरी खत्म करने के बाद यहां आकर रामलीला मंचन की तैयारी करते हैं। रामजन्म से दशरथ मरण तक दशरथ का किरदार और सीताहरण से रावण दहन तक रावण का किरदार निभातें है।
कुंभकरण
कुंभकरण का किरदार निभा रहें पार्थ दुबे विद्यार्थी हैं। इसके साथ ही वे सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे हुए हैं, तैयारी के साथ साथ कुंभकरण का किरदार निभा रहें है।