
संस्थाओं ने फंड जुटाकर बाढ़ पीडि़तों के लिए दी थी राहत सामग्री, पांच साल बाद केरल भेजी
पूनम सोनी/होशंगाबाद। पांच साल पहले शहर में आई बाढ़ के लिए एकत्र की गई राहत सामग्री पीडि़तों तक पहुंची ही नहीं। इसे सर्दी के समय फुटपाथ पर रहने वालों के लिए हर साल बांटा जा रहा है। दो दिन पहले ही करीब ४० बंडलों में रखे कंबल और कपड़े केरल बाढ़ पीढि़तों के लिए भेज दिए गए हैं। गौरतलब है कि २०१३ में भारी बारिश के चलते शहर में बाढ़ की स्थिति बन गई थी। ऐसे में लोगों की परेशानी को देखते हुए शहरवासी और सामाजिक संगठन उनकी मदद के लिए सामने आए और राहत सामग्री एकत्र कर रेडक्रास के लिए सौंपी गई थी।
दो दिन पहले भेजी गई केरल
2013 में एकत्र की गई राशि को बांटने में प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई और इसे रेडक्रास में रखवा दिया। जिसे हर साल सर्दी के दौरान फुटपाथ पर रहने वालों को बांट दिया जाता था, लेकिन शुक्रवार को करीब ४० बंडल कपड़े, चादर सहित अन्य सामग्री केरल बाढ़ पीडि़तों के लिए बांट दी है। सूत्रों की माने तो ये माामला टीएल बैठक में शामिल हुआ था लेकिन फिर समय पर इसकी इसे केरल भेजने में देरी की गई।
लायंस क्लब हर साल इकठ्ठा करता है करोड़ों का फंड
कहीं भी बाढ़ पीडि़तों के लिए मदद की बात हो तो सबसे पहला फंड लायंस क्लब द्वारा दिया जाता है। अंतराष्ट्रीय लायंस क्लब प्रांत 3233 जी 2 एवं सहित अन्य प्रांत के सदस्य प्राकृतिक आपदा और विकास कार्यों के लिए समय-समय पर फंड (सदस्यता शुल्क) एकत्र कर प्रशासन के लिए सौंप देते हैं। इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अंतरराष्ट्रीय स्तर एवं बाकी का हिस्सा स्थानीय स्तर पर उपयोग किया जाता है। क्लब के सदस्यों ने बताया कि 1971, 1973 और 2005 में आई बाढ़ के दौरान होशंगाबाद में इंटरनेशल कंबल, हेल्थ किट, दवाइयां, फूड पैकेट, कपड़े, घरेलु किराना किट एवं अन्य आवश्यकता अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई है।
केरल भेजी है सामग्री
उक्त सामग्री 2013 में आई बाढ़ के दौरान एकत्रित की गई थी। जो अब केरल बाढ़ पीडि़तों को भेज दी गई है। दो दिन पहले भेजे गए 37 बंडलों में कपड़े और अन्य सामान थे।
शेर सिंह बडकुर, रेडक्रास कार्यालय प्रभारी
डिजास्टर रेस्क्यू सेंटर जिले में 12 बनाए
डिस्ट्रिक कमांडेंट आर.के.एस चौहान ने बताया कि बाढ़ आने वाले शहरों व गांवों में 12 डिजास्टर रेस्क्यू सेंटर बनाए गए हैं। जिसमें तवानगर, बांद्राभान, सांघा खेड़ा, सोहागपुर, गनेरा, पनवर्री, सेठानीघाट, बाबई, सांगाखेड़ा, सांडिया, आंबलीघाट, आगरा खुर्दे जैसी जगहों पर बनाए गए है।
जिले में उपलब्ध आपदा प्रबंधन की सामग्री
सामग्री- संख्या
स्नेक केचर- 2
रिफलेक्टिव जाकेट- 514
रोप लेडर- 05
मोटर बोट परिवहन ट्राला- 02
इमरजेंसी टेन्ट- 05
एफआरपी हेलमेट विथ लाईट- 50
एफ आर पी रोप ब्रिज- 06
फ्लोटिंग स्टेचर- 05
स्टेचर फोल्डिंग- 05
स्टेचर केन वांस- 37
रेन कोट- 100
लाइफ जैकेट- 362
लाईफवाय रिंग- 84
एल्यूमीनियम सीढ़ी- 02
रवर बोट- 08
एफ आर पी मोटर वोट- 01, नाव प्लाई-02
एफ आर पी रेस्क्यू स्पीड बोट- ०१
फायबर मोटर बोट- ०२
एल्यूमोनियम बोट-02
बाढ़ आपदा से बचाव के लिए वॉलेंटियर्स
जिले में 2000 वोलेंटियर्स, 21 मोटर बोट, 200 आपदा मित्र, 70 होमगार्ड जवान, बाबई10 जवान
Published on:
17 Sept 2018 03:27 pm
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