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संघ तैयार कर रहा नर्मदापुरम संभाग के विधायकों की रिपोर्ट

बैतूल में जिला अध्यक्ष के काम काज पर भी नजर, 5 में से 4 विधानसभा में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था

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संघ तैयार कर रहा नर्मदापुरम संभाग के विधायकों की रिपोर्ट

संघ तैयार कर रहा नर्मदापुरम संभाग के विधायकों की रिपोर्ट

नर्मदापुरम। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जनता से दूर और परिवार के लोगों को परेशान करने वाले और विकास कार्यों में रुचि न लेने वाले नर्मदापुरम संभाग के विधायकों का रिपोर्ट कार्ड बनाना शुरू कर दिया है। संभाग में कुल 11 विधायक जनता के बीच काम कर रहे हैं। इसमें 4 कांग्रेस के विधायक बैतूल के हैं। जबकि बीजेपी के वर्तमान कुल 7 विधायक हैं। वर्तमान में 7 में से 3 विधायक ऐसे हैं, जिनका काम संतोषजनक नहीं है। इनको चेताया भी जा चुका है, लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई अंतर नहीं आया है। ऐसे में एक बार फिर सभी विधायकों की गोपनीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अगर वक्त रहते जनप्रतिनिधि नहीं सुधरे तो उनका टिकट कटना तय है। नर्मदापुरम संभाग की जनता ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सभी 7 विधायक चुन कर दिए थे। इनमें कई ऐसे भी थे, जिनकी जीत पर पार्टी को संशय था, लेकिन वे भी मोदी लहर में जीत गए। इसके साथ ही अंतिम समय में तो होशंगाबाद विधानसभा सीट पर संघ को ताकत झोंकनी पड़ गई थी। जनता को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्याओं को जनप्रतिनिधि जरूर प्राथमिकता पर सुनेंगे। शुरुआत में जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए विधायकों ने बड़े- बड़े वादे किए। लेकिन लोगों की समस्याओं को हल ही नहीं हो पा रहा है। हालत इतने खराब है कि स्वास्थ्य और नगर पालिका के बाबूओं जो संघ परिवार के करीबी माने जाते हैं कि उनके ट्रांसफर के लिए मंत्री पद का दावा करने वाले हटाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। ऐसे में पार्टी को स्थानीय और समाजिक स्तर पर नुक्सान हो रहा है। अधिकांश विकास की योजनाएं भी बेहद धीमी गति से चल रही हैं, जिन पर जनप्रतिनिधि आवाज तक नहीं उठा रहे हैं। पुलिस, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसे अहम विभागों में लोग काम कराने के लिए परेशान हो रहे हैं। इसे देखते हुए संघ सक्रिय है। संघ के पदाधिकारियों, स्वयं सेवकों ने अलग-अलग वर्ग में बैठकर विधायकों के कामों की रिपोर्ट लेनी शुरू कर दी है। पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

मुख्यमंत्री भी लेंगे फीड बैक
मुख्यमंत्री योगी शिवराज सिंह भी अपने विधायकों के कामकाज की रिपोर्ट लेने की तैयारी में हैं। संघ के पदाधिकारियों ने विधायकों के कामकाज पर काफी आपत्ति भी दर्ज करा चुके है। जानकारों का कहना है कि यही कारण रहा कि नर्मदापुरम से ऐसा कोई विधायक सामने नहीं आ पाया जिसे मंत्री पद से नवाजा जाता। जबकि कुछ विधायकों ने संगठन के सामने एेसे हालात पैदा किए थे कि उनके चुनावी टीकट कटने से नर्मदापुरम की चारों विधानसभा हार का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अंत में उन्हें संघ की शरण में जाना पड़ गया था।