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शादी में निभाई जाती है यें अनूठी परंपरागत रस्मे, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर

शादी में रस घोलती रस्में...

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शादी में निभाई जाती है यें अनूठी परंपरागत रस्मे, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर

होशंगाबाद। हिंदुमान्यता के अनुसार अनेक ऐसी पंरपराएं, रीति रिवाज, रस्में हैं जिनके बिना विवाह अधूरे समझे जाते है। यहीं बात है कि पुराने जमाने से चली आज रहीं ये परंपराएं आज भी लोगो के बीच कायम है। और हर घर में शादी के वक्त निभाई जाती है। चाहे बात बारात की अगवानी हो या दुल्हन का दुल्हेराजा के चेहरे पर चावल फेंकना। शादीयों का सीजन भी शुरू हो गया है। अब हर जगह बारात का नजारा देखने को मिलेगा साथ ही इन रस्मों को भी देखा जाएगा। कहा जाता है कि हर रस्म, हर पंरपरा का अपना एक अलग अंदाज और महत्व होता है। घर के बुजुर्ग कहते है कि इन पंरपराओं के बदले दुल्हा, दुल्हन को लोगो का प्यार और सत्कार मिलता है। इसलिए आज भी लोग विवाह समारोह में इन्हें पूर्ण रूप से निभाना पसंद करते हैं।इन रस्मों को देखकर हो सकता है कि आप भी अपने शादी के खुबसूरत पलों को याद करें। तो आइए जानते है इन छोटी-छोटी परंपराओं के बारे में।

ये हैं रस घोलती रस्में

चावल फेंकना
दूल्हे के स्वागत के समय दुल्हन स्वागत स्थल पर आकर दूल्हे का मुंह देखकर हल्दी के चावल उसके ऊपर फेंकती है, ताकि वह अपने भावी जीवनसाथी को विवाह पूर्व देख सके कि वह उसके अनुकूल है या नहीं इस बात का अंदाजा लगा सके।

जूता छुपाई की रस्म
जीजा ***** का प्यारभरी नोकझोंक से भरी ये रस्म जूता छुपाई की रस्म। ये रिवाज केवल फिल्मों नहीं आज भी आम जीवन में भी हंसी-ठिठोली के साथ निभाई जाती है। सालियों द्वारा जीजाजी से नेग मांगने के लिए ये जूते छिपाने की पंरपरा निभाई जाती है। बताया जाता है कि इस रस्म से दूल्हे का मूल्यांकन भी किया जाता है।

द्वाराचार
द्वाराचार में वरपक्ष कन्यापक्ष से मिलता है, ताकि वे दोनों एक-दूसरे को समझ सकें। इस परंपरा का अर्थ है कि पूरे शहर में बारात को घुमाकर लोग यह जान जाएं कि दूल्हा कैसा है, साथ ही जो बारात आई है वह तयशुदा है।

मुंह दिखाई
ंमुंह दिखाई की रस्म में सासू मंा व पड़ोस की महिलाएं नववधू का घूँघट खोलकर उसे नेग देती हैं कि कहीं उनकी प्यारी वधू को नजर न लग जाए, इसलिए बलैया लेती हैं। यह परंपरा बहू के चेहरे को देखने के लिए शुरू की गई।

द्वार रोकना
शादियों में वर-वधू का द्वार सालिया व बहनें रोकती हैं। इसके चलते दूल्हे द्वारा उन्हें नेग दिया जाता है। इसका एक पक्ष ससुराल में बहन द्वारा अपनी भाभी से परिचय करना भी है, जिससे दोनों के बीच अपनत्व की भावना पनप सके।

मांग भराई
विवाह मंडप में पगफेरों के समय दूल्हा अपनी दुल्हन की मांग में लाल रंग का सिंदूर भरता है, ताकि वह सदा सुहागन रहे व समाज में उसकी पत्नी के रूप में जानी जाए। यानी प्रतीकात्मक रूप से दुल्हन द्वारा माथे पर सिंदूर लगाया जाता है कि वह शादीशुदा है।