
मां विजयासन के दर्शन के लिए सुबह 5.30 बजे खुलेंगे पट, तीन बार होगी आरती,मां विजयासन के दर्शन के लिए सुबह 5.30 बजे खुलेंगे पट, तीन बार होगी आरती,मां विजयासन के दर्शन के लिए सुबह 5.30 बजे खुलेंगे पट, तीन बार होगी आरती
नर्मदापुरम। नवरात्र में सलकनपुर में पहुंचने वालों की संख्या लाखों में होगी। इसे लेकर सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। श्रद्धालुओं के पीने के पानी से लेकर छाव में बैठने तक के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए चैत्र में तीन समय आरती का लाभ मिल सकेगा। जिसमें सुबह 5.30 बजे और अंतिम आरती रात को 11.30 बजे की जाएगी। सुबह 5.30 बजे से श्रद्धालुओं को मातारानी के दर्शन का लाभ मिल सकेगा।
ऐसे होगी मातारानी की आरती का समय
- सुबह 5.30 बजे, सुबह 11.30 बजे और रात को 7.30 बजे
- श्रद्धालुओं के लिए सुबह 5.30 बजे से मंदिर के पट खुल जाएंगे। 11.30 की आरती के बाद भोग के लिए पट को बंद किया जाएगा। इसके बाद रात के 8 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।
मंदिर तक कैसे पहुंचे
सलकनपुर मां विजयासन देवी का मंदिर 1000 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान है। इस मंदिर पर पहुंचने के लिए भक्तों को 1400 सीढिय़ों से चढ़कर जाना होता है। जबकि इस पहाड़ी पर जाने के लिए अब सड़क मार्ग भी बना दिया गया है। यह रास्ता करीब साढ़े 4 किलोमीटर लंबा है। इसके अलावा दर्शनार्थियों के लिए रोप-वे भी शुरू हो गया है, जिसकी मदद से यहां पांच मिनट में पहुंचा जा सकता है। सलकनपुर राजधानी भोपाल से 75 किलोमीटर दूर है, तो नर्मदापुरम से इस मंदिर की दूरी 40 किलोमीटर है। जबकि इंदौर से 180 और सीहोर से यह मंदिर 90 किमी की दूर है। इन सभी शहरों से मंदिर पुहंचने के लिए बसें मिलती हैं।
मंदिर की विशेषता
पुराणों के अनुसार देवी विजयासन माता पार्वती का ही अवतार हैं। जिन्होंने देवताओं के आग्रह पर रक्तबीज नामक राक्षस का वध किया था और सृष्टि की रक्षा की थी। विजयासन देवी को कई लोग कुलदेवी के रूप में भी पूजते हैं। माता कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी का आशीर्वाद देती हैं, वहीं भक्तों की सूनी गोद भी भरती हैं. भक्तों की ही श्रद्धा है कि इस देवीधाम का महत्व किसी शक्तिपीठ से कम नहीं हैं।
स्वयं-भू है देवी विजयासन की प्रतिमा
मां विजयासन देवी की प्रतिमा स्वयं-भू है। यह प्रतिमा माता पार्वती की है, जो वात्सल्य भाव से अपनी गोद में भगवान गणेश को लेकर बैठी हुई है। इस भव्य मंदिर में महालक्ष्मी, महासरस्वती और भगवान भैरव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। भक्तों का कहना है कि एक मंदिर में कई देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने का सभी को सौभाग्य मिल जाता है।
श्रीमद् भागवत महापुराण में उल्लेख
श्रीमद् भागवत कथा के अनुसार जब रक्तबीज नामक देत्य से त्रस्त होकर जब देवता देवी की शरण में पहुंचे. तो देवी ने विकराल रूप धारण कर लिया और इसी स्थान पर रक्तबीज का संहार कर उस पर विजय पाई. मां भगवति की इस विजय पर देवताओं ने जो आसन दिया, वहीं विजयासन धाम के नाम से विख्यात हुआ और मां का यह रूप विजयासन देवी कहलाया।
इनका कहना है
हमने नवरात्र के लिए पूरे इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं को इस बार फिर से ठंडा जल मिल सकेगा। हम श्रद्धालुओं के लिए पानी के इंतजाम कर रहे हैं।- महेश उपाध्याय, अध्यक्ष सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट
Published on:
02 Apr 2022 10:17 am
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