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होशंगाबाद. विस अध्यक्ष के परिवार के व्दारा सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाए गए स्कूल व दुकानों के अतिक्रमण को हटाए जाने के प्रशासन के आदेश के बाद प्रदेश स्तर पर राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस ने इस मुद्दे को बुधवार को प्रमुखता से उठाया। पार्टी के मीडिया सेल प्रभारी मानक अग्रवाल ने भोपाल में बयान जारी कर मांग की है कि विस अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा पिताश्री पंडित रामलाल शर्मा के नाम पर होशंगाबाद में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर चल रहे स्कूल और अवैध दुकानों को तत्काल तोड़ा जाए। साथ ही उक्त सरकारी जमीन से कमाए दो अरब रुपए सरकारी खजाने में जमा कराए जाएं।
उच्च स्तरीय दबाव से लौटा नपा का अमला
अग्रवाल ने कहा कि कलेक्टर की जांच से इस बात की पुष्टि हो गई है कि विस अध्यक्ष डॉ. शर्मा के भाई और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा ने 59 हजार 400 वर्गफीट सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर स्कूल व दुकानें बना ली है। यह जमीन नगरपालिका के आधिपत्य की है। जब जिला प्रशासन के आदेश की प्रति लेकर नपा का अमला अतिक्रमण हटाने पहुंचा, तब अचानक उच्च स्तर से आए दबाव के कारण वह चुपचाप वापस लौट आया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनते ही जमीन पर बीते 14-15 साल से शर्मा परिवार का अवैध कब्जा है।
विस अध्यक्ष के रसूख के कारण नहीं हट रहा कब्जा
मानक अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि विस अध्यक्ष के रसूख और दबाव के कारण अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। डॉ. शर्मा संवैधानिक पद पर हैं, जहां से वे अक्सर लोकतंत्र की रक्षा की दुहाई देते रहते हैं। अब उनके स्वयं का परिवार सरकार की नाक के नीचे खुलेआम नियम-कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रहा है। इस अतिक्रमण से शर्मा परिवार ने लगभग दो अरब रुपए का लाभ कमाया है। सरकार को इसे भी जब्त कर सरकारी खजाने में जमा करना चाहिए, ताकि यह राशि लोकहित में खर्च की जा सके।
बहुत सारी बेनामी व सरकारी संपत्ति है
मानक यह भी आरोप लगाया है कि सरकारी जमीन पर स्कूल व दुकानों का यह तो केवल एक उदाहरण है जो कलेक्टर की जांच में सामने आया है। यदि सघन जांच की जाए तो ऐसी बहुत सारी बेनामी और सरकारी संपत्ति सामने आ सकती है, जिस पर शर्मा परिवार का कब्जा है। विस के आखिरी सत्र में यह मामला आने वाला था। इसके अलावा इटारसी नपा में व्याप्त चरम सीमा को पार करने वाले भ्रष्टाचार का मामला भी विस में उठने वाला था। इस बात की भनक लगते ही येन-केन-प्रकारेण पांच दिन का सत्र डेढ़ दिन में भी समाप्त कर दिया गया। यह लोकतंत्र की हत्या का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
Published on:
28 Jun 2018 10:56 am
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