
patrika big news-ये सेंट्रल जेल नवाचार में मध्यप्रदेश की पहली जेल
देवेंद्र अवधिया
नर्मदापुरम की संभागीय सेंट्रल जेल में कैदियों को आत्मनिर्भर व स्वरोजगार से जोडऩे के साथ ही नदी-पर्यावरण के संरक्षण के लिए भी नए प्रयोग किए जा रहे हैं। बंदियों ने सीमेंट-क्रांकीट से घरों-दफ्तरों के परिसरों और सड़क किनारे-पार्कों में उपयोग की जाने वाले सीमेंट के गमले, बैंच और पानी की टंकियों का निर्माण किया है। इन्हें बाजार मूल्य से कम दाम पर बेच रहे। लोग इन्हें खरीदकर अपने घरों में फुलवारी सजा रहे। कर रहे हैं, इनकी बिक्री भी बाजार मूल्य से कम में हो रही है, गमले घरों, कार्यालयों ये सामग्री पौधे लगाने, बैंच पार्कों, सड़कों के किनारे पॉथवे आदि स्थानों पर सार्वजनिक उपयोग के लिए एवं पानी की टंकियां गौशालाओं, निराश्रित पशुओं को चारा-पानी के लिए बेहद उपयोगी और सस्ती साबित हो रही है। इन सामग्रियों को डिप्लोमाधारी प्रहरी की डिजाइन के अनुरूप कैदी निर्माण कर आकर्षक पेंटिंग कर तैयार कर रहे, इस अदभुत नक्काशी की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी सराहना की है। इसके साथ ही बंदी नर्सरी के साथ ही बर्मी कम्पोस्ट भी तैयार कर रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव को रोकने मददगार बन रहे। जेल में अब कोई भी बंदी निरक्षर नहीं है। 21 बंदी बीए की डिग्री ले रहे हैं। नर्मदापुरम की ये सेंट्रल जेल नवाचार के मामले में देश की चुनिंदा जेलों में एक एवं मध्यप्रदेश की पहली जेल है।
सीमेंट के गमले, बैंच, गौशाला एवं निराश्रित पशुओं के लिए पानी की टंकियां बंदी प्रहरी ब्रजलाल कुमरे की देखरेख में बना रहे। कुमरे आईटीआई डिप्लोमाधारी है। बंदियों ने इनके निर्माण के साथ ही अद्भुत नक्काशी व पेटिंग से इन्हें सामग्रियों को बेहद आकर्षक बनाया है। इन सामग्रियों के सरकारी विभागों, संस्थानों एवं लोगों घरेलु उपयोग के लिए भी ऑर्डर मिलने के साथ खरीदी भी हो रही है। बैंच बाजार मूल्य 5 हजार से कम 3500 रुपए में, टंकियां 500 की जगह 300 एवं गमले 120 रुपए की जगह 80 रुपए मिल रहे। ये सीमेंटेड सामग्री बाजार से 30-40 फीसदी इसलिए सस्ती मिल रही, क्योंकि इसमें मजदूरी का चार्ज नहीं लगता। कैदियों के श्रम से ही इनका निर्माण हो रहा है। यह नई पहल प्लास्टिक की उक्त सामग्रियों के बहुतायत को रोकने के लिए भी पर्यावरण संरक्षण व बंदियों के रोजगार की दृष्टि से बेहतर साबित हो रही है।
5 रुपए किलो में वर्मी कम्पोस्ट खाद
जेल में बंदी वर्मी कम्पोस्ट खाद भी बना रहे। 15 बैग खाद निर्मित की है। इसमें ट्राइकोडर्मा का उपयोग किया जा रहा है। जो मिट्टी को ऊपजाऊ व फंगस रहित बनाता है। नर्सरी के लिए वर्मी कम्पोस्ट की दर 5 रुपए किलोग्राम रखी गई है। इस वर्ष 50 वर्मी बैग तैयार करने का लक्ष्य लिया गया है। इसका उपयोग जेल की दस एकड़ खेती व नर्सरी में किया जा रहा है, ताकि फसलों को कीट व खरपतवार से बचाकर भूमि ऊपजाऊ रखा जा सके। जेल में जैविक खेती हो रही है।
नर्मदा संरक्षण में देश व प्रदेश की पहली जेल बनी
नर्मदा नदी के संरक्षण में नर्मदापुरम की ये जेल प्रदेश व देश की पहली जेल बन गई है। यहां के बंदी नर्मदा नदी के संरक्षण व प्रदूषण को रोकने आटे के दीपक बना कर स्वयंसेवी संस्थाओं से प्राप्त आटे से बहुत ही कम दर पर दीपक तैयार कर सेठानीघाट पर वितरित कर रहे।
जेल में कोई बंदी निरक्षर नहीं, कर रहे पढ़ाई
जेल में वर्तमान में कोई बंदी-कैदी निरक्षर नहीं है। 21 बंदी इग्नू के जरिए बीए की डिग्री ले रहे हैं. दसवीं कक्षा के लिए भी केंद्र शुरू किया जा रहा है। लगभग 70 बंदी ऐसे हैं, जिनको जेल में सारक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से साक्षर किया जा रहा है।
इनका कहना है...
सेंट्रल जेल नर्मदापुरम-खुली जेल में नवाचार के तहत नए कार्य किए जा रहे हैं। देश की चुनिंदा जेलों में एक एवं प्रदेश की पहली जेल हैं, जहां इसमें सीमेंटेड गमले, बैंच-टंकियां खुद बंदी बना रहे। सस्ती दरों पर बेच रहे। रासायनिक खेती को कम करने वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर वितरित कर रहे। नर्मदा नदी के सरंक्षण व प्रदूषण को रोकने आटे के दीपक भी बनाकर सेठानीघाट पर दे रहे। जेल में सभी बंदी-कैदी साक्षर हो चुके हैं। बीए की पढ़ाई कर रहे हैं। नवाचार का उद्देश्य जेल की आय बढ़ाना, शासकीय संस्थाओं को कम दर पर सामग्रियां मुहैया कराना एवं बंदियों को रोजगार के साथ स्वरोजगार का प्रशिक्षण देना है।
-संतोष सिंह सोलंकी, अधीक्षक संभागीय सेंट्रल जेल नर्मदापुरम।
Published on:
10 Apr 2022 12:06 pm
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